Power Tariff Jayram Mahato

“बिजली महंगी कर सरकार ने जनता की जेब पर डाला सीधा डाका”

झारखंड/बिहार ताज़ा ख़बर विधानसभा चुनाव

मुख्य बिंदु 

  • झारखंड में बिजली दरों में बढ़ोतरी, ग्रामीण और शहरी उपभोक्ताओं पर असर
  • ग्रामीण दर 6.70 से बढ़कर 7.20 रुपये प्रति यूनिट
  • शहरी दर 6.85 से बढ़कर 7.40 रुपये प्रति यूनिट
  • व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए भी बिजली महंगी
  • डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो ने फैसले को बताया जनविरोधी

झारखंड में बिजली दरों में बढ़ोतरी, सरकार के फैसले पर सवाल

झारखंड में बिजली दरों में हालिया बढ़ोतरी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो ने सोशल मीडिया के माध्यम से राज्य सरकार के इस निर्णय पर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने इसे आम जनता के हितों के खिलाफ बताया है।

ग्रामीण और शहरी उपभोक्ताओं पर सीधा असर

सबसे पहले अगर नई दरों की बात करें, तो सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली दर 6.70 रुपये से बढ़ाकर 7.20 रुपये प्रति यूनिट कर दी है। वहीं, शहरी उपभोक्ताओं के लिए यह दर 6.85 रुपये से बढ़ाकर 7.40 रुपये प्रति यूनिट निर्धारित की गई है।

इस बढ़ोतरी के बाद साफ है कि इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा, खासकर उन परिवारों पर जो पहले से महंगाई का सामना कर रहे हैं।

व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर भी बढ़ा बोझ

इसके अलावा, सरकार ने व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए भी बिजली महंगी कर दी है।

  • ग्रामीण क्षेत्रों में 5 किलोवाट से अधिक लोड वाले उपभोक्ताओं के लिए दर 6.20 से बढ़ाकर 6.70 रुपये प्रति यूनिट
  • शहरी क्षेत्रों में यही दर 6.70 से बढ़ाकर 7.30 रुपये प्रति यूनिट कर दी गई है

इस फैसले से छोटे दुकानदारों, व्यवसायियों और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

विधायक जयराम महतो का सरकार पर हमला

विधायक जयराम कुमार महतो ने अपने बयान में कहा कि सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए आम जनता पर बोझ डाल रही है, जबकि अन्य विकल्पों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अवैध खनन पर लगाम लगाकर सरकार अपने राजस्व में वृद्धि कर सकती है, लेकिन इसके बजाय गरीब और मध्यम वर्ग को निशाना बनाया जा रहा है।

राजस्व बढ़ाने के वैकल्पिक सुझाव भी दिए

हालांकि, उन्होंने केवल आलोचना ही नहीं की बल्कि समाधान भी सुझाए।
उन्होंने कहा कि:

  • अवैध खनिज कारोबार पर नियंत्रण कर राजस्व बढ़ाया जा सकता है
  • शहरी क्षेत्रों में सर्किल रेट और वास्तविक जमीन कीमत के बीच बड़े अंतर को खत्म किया जाए
  • इससे न केवल सरकारी आय बढ़ेगी बल्कि काले धन पर भी नियंत्रण संभव होगा

सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की मांग

अंत में, विधायक ने सरकार से अपील की है कि वह बिजली दरों में हुई इस बढ़ोतरी पर पुनर्विचार करे और इसे वापस ले।

उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति में यह फैसला जनाकांक्षाओं के खिलाफ है और इससे आम लोगों की आर्थिक स्थिति पर और दबाव पड़ेगा।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, झारखंड में बिजली दरों में बढ़ोतरी ने राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। एक ओर सरकार इसे राजस्व संतुलन का कदम मान रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे जनविरोधी निर्णय बता रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा और गरमा सकता है।

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