झारखंड में आदिवासी अधिकारों पर संकट, सिरम टोली से उठी आदिवासी बचाओ महारैली की मांग
मुख्य बिंदु:
सिरम टोली सरना स्थल पर आदिवासी बचाओ मोर्चा की बैठक संपन्न
नगड़ी में जबरन भूमि अधिग्रहण, सिरम टोली फ्लाईओवर निर्माण का विरोध
भोगनाडीह में सिद्धू-कान्हू वंशजों पर लाठीचार्ज की निंदा
अक्टूबर में राज्यस्तरीय ‘आदिवासी बचाओ महारैली’ का ऐलान
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन होगा एल्बर्ट एक्का चौक पर
रांची-
राज्य में आदिवासी अधिकारों, जमीन और संस्कृति की रक्षा के मुद्दे को लेकर आज रांची के सिरम टोली सरना स्थल में आदिवासी बचाओ मोर्चा और सिरम टोली बचाओ मोर्चा के तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव ने की, जबकि संचालन आदिवासी युवा नेता आशीष बेक ने किया।
बैठक में सिरम टोली रैंप और कनेक्टिंग फ्लाईओवर निर्माण के विरोध के साथ-साथ नगड़ी इलाके में जबरन भूमि अधिग्रहण को लेकर कड़ा विरोध दर्ज किया गया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार पेसा कानून और आदिवासी जमीन कानूनों की खुलेआम अनदेखी कर रही है।
सरकार पर लगे जनविरोधी नीतियों के आरोप
वक्ताओं ने हेमंत सोरेन सरकार पर सीधा हमला करते हुए कहा कि झारखंड में न धर्म बच रहा है, न नौकरी और न ही जमीन। आदिवासियों के विरोध में सरकार जनविरोधी नीतियों को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में लाखों एकड़ भूमि फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए भूमाफियाओं के हाथों बेची जा रही है और सरकार मूकदर्शक बनी हुई है।
भोगनाडीह लाठीचार्ज की निंदा, हेमंत सोरेन का पुतला दहन तय
बैठक में भोगनाडीह में सिद्धू-कान्हू मुर्मू के वंशजों और ग्रामीणों पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज की कड़ी निंदा की गई। इसे स्वतंत्रता संग्राम के नायकों का अपमान बताते हुए मोर्चा ने निर्णय लिया कि 4 जुलाई को रांची के एल्बर्ट एक्का चौक पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन किया जाएगा।
महारैली की घोषणा और जिला स्तरीय अभियान
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि अक्टूबर माह में राजधानी रांची में ‘आदिवासी बचाओ महारैली’ का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा, राज्यभर में जिला स्तरीय संगठन निर्माण के लिए दौरा किया जाएगा और सामाजिक समन्वय स्थापित किया जाएगा। मोर्चा ने नगड़ी में कृषि योग्य भूमि के अधिग्रहण के खिलाफ संघर्ष और तेज करने का भी ऐलान किया।
भ्रष्टाचार और योजनाओं के दुरुपयोग पर चिंता
बैठक में यह भी कहा गया कि राज्य के विभिन्न विभागों में अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित विशेष योजनाओं का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। आदिवासी हितों को दरकिनार करते हुए योजनाएं अन्य विभागों में खर्च की जा रही हैं, जो संविधान और सामाजिक न्याय के खिलाफ है।
उपस्थित प्रमुख चेहरे
इस बैठक में कई सामाजिक कार्यकर्ता, आदिवासी नेता और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख नाम रहे – देव कुमार धान, प्रेम शाही मुंडा, निरंजना हेरेंज, कुंदरसी उरांव, फूलचंद तिर्की, दुर्गावती निशा भगत, अनिल उरांव, हर्षिता मुंडा, प्रकाश मुंडा, रजनीश उरांव, बुधुवा उरांव, राम पाहन, मुनि पाहन, शीला कक्षप, उर्मिला भगत, शिमला मुंडा, मुनी टूटी, आकाश बेक, विजय उरांव, कर्मा गाड़ी, और संगीता उरांव।
