कांग्रेस और भाजपा दोनों पर आदिवासी हितों की अनदेखी का आरोप।

झारखंड/बिहार विधानसभा चुनाव

झारखंड में पेसा कानून लागू करने की मांग तेज, आदिवासी संगठनों का संयुक्त प्रेसवार्ता.

मुख्य बिंदु:

  1. आदिवासी क्षेत्र सुरक्षा परिषद समेत अन्य संगठनों द्वारा पेसा कानून लागू करने की मांग

  2. झारखंड सरकार पर पेसा नियमावली को लेकर उदासीनता का आरोप

  3. पंचायती राज विभाग पर आरएसएस और भाजपा के प्रभाव का आरोप

  4. कांग्रेस पर आदिवासी विरोधी मानसिकता का आरोप

  5. 10 अप्रैल को रांची में संयुक्त प्रेस वार्ता प्रस्तावित



पेसा कानून को लागू करने की मांग को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन
आदिवासी क्षेत्र सुरक्षा परिषद अन्य आदिवासी संगठनों के साथ मिलकर झारखंड में पेसा कानून 1996 को उचित पेसा नियमावली के साथ लागू कराने की मांग को लेकर राज्यव्यापी अभियान चला रहा है। आदिवासी समुदाय के संवैधानिक, कानूनी और पारंपरिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए यह आंदोलन कई महीनों से जारी है।

सरकार की चुप्पी पर सवाल
संगठनों का आरोप है कि राज्य सरकार, विशेषकर पंचायती राज विभाग, पेसा कानून को लेकर गंभीर नहीं है। आरोप है कि विभाग में आरएसएस और भाजपा का हस्तक्षेप है, जबकि कांग्रेस पार्टी के मंत्री विभाग को प्रभावी ढंग से संचालित नहीं कर पा रहे हैं। संगठनों ने कांग्रेस पर भी आदिवासी हितों की अनदेखी का आरोप लगाया है।

कांग्रेस पर बाहरी ताकतों के हित साधने का आरोप
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि कांग्रेस पार्टी आदिवासी हितों की रक्षा के प्रति उदासीन है क्योंकि वह बाहरी ताकतों की समर्थक रही है। यही कारण है कि पेसा कानून को नियमावली सहित जल्द लागू करने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की जा रही।

रांची में संयुक्त प्रेस वार्ता का आयोजन
इसी क्रम में 10 अप्रैल 2025 को अपराह्न 3 बजे एस.डी.सी., डॉ. कॉमिल बुल्के पथ, रांची में आदिवासी संगठनों द्वारा एक संयुक्त प्रेसवार्ता आयोजित की गई है। इसमें पेसा आंदोलन की अगली रणनीति की घोषणा की जा सकती है।

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