Jharkhand university bill Need based teachers

विधेयक का स्वागत, पर अधूरी मांग: नीड बेस्ड सहायक प्राध्यापक बोले-अब स्थायी करें

झारखंड/बिहार रोज़गार समाचार

झारखंड विश्वविद्यालय विधेयक पर नीड बेस्ड सहायक प्राध्यापक संघ का स्वागत, स्थायीकरण की उठी मांग

झारखंड में उच्च शिक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य सरकार द्वारा झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक पारित किया गया है। इस फैसले का नीड बेस्ड सहायक प्राध्यापक संघ, झारखंड ने स्वागत किया है और इसे शिक्षा व्यवस्था के लिए सकारात्मक पहल बताया है।

“उच्च शिक्षा में सुधार की दिशा में बड़ा कदम”

संघ के अध्यक्ष Dr. Tribhuvan Kumar Sahi ने अपने बयान में कहा कि यह विधेयक विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक ढांचे में सुधार लाने के साथ-साथ कार्यकुशलता बढ़ाने में सहायक होगा। उन्होंने इसे उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए एक अहम और दूरगामी कदम बताया।

समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोर

डॉ. साही ने कहा कि विधेयक में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ-साथ इसका समय पर क्रियान्वयन बेहद जरूरी है।
उन्होंने चिंता जताई कि झारखंड में कई अच्छी योजनाएं देर से शुरू होती हैं और लंबे समय तक लंबित रहती हैं। ऐसे में सरकार को इस विधेयक को तय समय सीमा में प्रभावी ढंग से लागू करना चाहिए।

नीड बेस्ड शिक्षकों के स्थायीकरण की मांग तेज

संघ ने विशेष रूप से वर्ष 2018 से विश्वविद्यालयों में कार्यरत नीड बेस्ड सहायक प्राध्यापकों के स्थायीकरण की मांग उठाई है।
संघ का कहना है कि ये शिक्षक लंबे समय से उच्च शिक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, इसलिए इनके भविष्य को सुरक्षित करना जरूरी है।

शिक्षा गुणवत्ता से जुड़ा मुद्दा

डॉ. साही के अनुसार, यदि राज्य सरकार इन शिक्षकों के स्थायीकरण पर ठोस निर्णय लेती है, तो इससे न केवल शिक्षकों को लाभ होगा बल्कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।

सरकार से जल्द फैसले की अपील

अंत में संघ ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह कल्याणकारी दृष्टिकोण अपनाते हुए नीड बेस्ड सहायक प्राध्यापकों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए शीघ्र और सकारात्मक निर्णय ले।

 इस पूरे मुद्दे ने झारखंड में उच्च शिक्षा और शिक्षकों के अधिकारों को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

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