📰 75% अनुदान वृद्धि पर राहत: अंतिम औपचारिकताओं के बाद कैबिनेट की मंजूरी संभव
वित्त रहित शिक्षकों को बड़ी राहत की उम्मीद, शिक्षा विभाग से विधि विभाग की मंजूरी बाकी
📌 मुख्य बिंदु:
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75% अनुदान वृद्धि पर सभी तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनें समाप्त
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विधि विभाग की स्वीकृति के बाद प्रस्ताव जाएगा कैबिनेट को
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प्रस्ताव “झारखंड राज्य वित्त रहित शैक्षणिक संस्थान अनुदान अधिनियम 2025” के तहत
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मोर्चा के नेता लगातार विधि विभाग से संपर्क में
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कैबिनेट की अगली बैठक में प्रस्ताव पारित होने की संभावना
वित्तीय अड़चनें खत्म, औपचारिक मंजूरी बाकी
झारखंड के वित्त रहित इंटर कॉलेज, उच्च विद्यालय, संस्कृत विद्यालय एवं मदरसा विद्यालयों के प्राचार्य, प्रधानाचार्य, शिक्षक और कर्मचारी 75% अनुदान वृद्धि को लेकर बड़ी उम्मीद में हैं। वित्त विभाग के अनुमोदन के बाद सभी तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनें समाप्त हो चुकी हैं, लेकिन अभी भी विधि विभाग की अंतिम स्वीकृति का इंतजार है।
शिक्षा विभाग का प्रस्ताव कैबिनेट के सामने
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने यह प्रस्ताव कैबिनेट को भेजा था, जिसमें कैबिनेट ने दो महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा था। पहला, अधिसूचना का प्रारूप विधि विभाग के माध्यम से विधिक्षा कर भेजा जाना, और दूसरा, संशोधन को “झारखंड राज्य वित्त रहित शैक्षणिक संस्थान अनुदान अधिनियम 2025” के तहत शामिल करना। शिक्षा विभाग ने यह प्रस्ताव विधि विभाग को भेज दिया है, लेकिन फिलहाल विधि विभाग से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
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मोर्चा के नेता लगातार प्रयासरत
वित्त रहित मोर्चा के वरिष्ठ नेता दिन-रात विधि विभाग से संपर्क में हैं ताकि प्रस्ताव जल्द स्वीकृत हो सके। यदि आज विधि विभाग से प्रस्ताव लौटता है, तो इसे कैबिनेट की अगली बैठक में पेश किया जाएगा। अन्यथा अगली बैठक में इसे शामिल किया जाएगा। मोर्चा के प्रतिनिधि मनीष कुमार, अरविंद सिंह और मुरारी सिंह ने कहा है कि सभी अड़चनें खत्म हो गई हैं, केवल औपचारिकताएं शेष हैं।
शिक्षकों को जल्द मिलेगा लाभ
75% अनुदान वृद्धि के प्रस्ताव के पारित होते ही वित्त रहित शिक्षकों को आर्थिक राहत मिलेगी, जिससे उनकी स्थिति में सुधार होगा और शिक्षा के क्षेत्र में स्थिरता बढ़ेगी। सभी संबंधितों से धैर्य बनाए रखने की अपील की गई है।
