नई दिल्ली/रांची: जेएसएससी सीजीएल (JSSC CGL) मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा फैसला सामने आया है। शीर्ष अदालत ने उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें झारखंड हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि झारखंड हाई कोर्ट पहले ही इस मामले की जांच के लिए एसआईटी (SIT) के गठन का निर्देश दे चुका है और फिलहाल ऐसी कोई ठोस वजह सामने नहीं आई है, जिससे नीतिगत निर्णयों को प्रभावित किया जाए। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को सुनवाई योग्य नहीं माना।
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान सफल अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने पक्ष रखा।
गौरतलब है कि इससे पहले झारखंड हाई कोर्ट ने जेएसएससी सीजीएल परीक्षा के रिजल्ट के प्रकाशन पर लगी रोक हटाते हुए सीबीआई जांच की मांग को खारिज कर दिया था। हाई कोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ असफल अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां अब उनकी याचिका नामंजूर कर दी गई है।
इसी क्रम में, 30 दिसंबर को हेमंत सोरेन ने 1910 सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे थे। नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ ही राज्य सरकार ने साफ संकेत दिया है कि चयन प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हाल के दिनों में कहा था कि एक बड़ा गैंग है, जो इस तरह की परीक्षाओं को प्रभावित करने की कोशिश करता है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि भविष्य में ऐसी कोशिशें दोबारा की गईं, तो संबंधित लोगों को सीधे जेल भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि क्यूआर कोड के माध्यम से करोड़ों रुपये की उगाही की गई और सीधे-साधे छात्रों को गुमराह किया गया।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से जेएसएससी सीजीएल के सफल अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है, वहीं नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर बना कानूनी असमंजस भी फिलहाल समाप्त होता नजर आ रहा है।
