JSSC Teacher Vacancy 2025

26001 शिक्षक बहाली पर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, पारा शिक्षकों के लिए 100 सीटें रिजर्व.

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26001 सहायक आचार्य बहाली मामला: हाईकोर्ट ने 100 सीटें पारा शिक्षकों के लिए रिजर्व रखने का दिया निर्देश

नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया के खिलाफ पारा शिक्षकों की याचिका पर आंशिक राहत, अगली सुनवाई 5 अगस्त को

रांची: झारखंड में चल रही 26001 सहायक आचार्यों की बहाली प्रक्रिया को लेकर लगातार विवाद और न्यायिक प्रक्रिया जारी है। इस बहाली में नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया के खिलाफ कई पारा शिक्षकों (सहायक अध्यापकों) ने याचिका दायर की थी, जिस पर आज झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई।

कोर्ट ने दिया सीटें आरक्षित रखने का निर्देश

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान JSSC (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग) को निर्देश दिया है कि 100 सीटें पारा शिक्षकों के लिए और 14 सीटें गैर पारा शिक्षकों के लिए फिलहाल रिजर्व रखी जाएं। इस बहाली प्रक्रिया में पारा शिक्षकों को पहले ही 50% आरक्षण का लाभ दिया गया है, बावजूद इसके बड़ी संख्या में पारा शिक्षकों ने नॉर्मलाइजेशन के खिलाफ आपत्ति जताई थी।

नॉर्मलाइजेशन के चलते बाहर हो गए पारा शिक्षक: याचिकाकर्ता का आरोप

पारा शिक्षकों का आरोप है कि नॉर्मलाइजेशन लागू होने के बाद उनके रॉ मार्क्स बेहतर होने के बावजूद वे अयोग्य घोषित कर दिए गए। उनका कहना है कि अगर केवल रॉ स्कोर देखा जाता, तो वे परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके होते। पारा शिक्षकों का यह भी तर्क है कि नियुक्ति नियमावली में कहीं भी नॉर्मलाइजेशन की व्यवस्था का उल्लेख नहीं है, इसलिए इस प्रक्रिया को रद्द किया जाना चाहिए।

रिजल्ट पर रोक की मांग, कोर्ट ने दिया आंशिक राहत

पारा शिक्षकों ने कोर्ट से मांग की थी कि रिजल्ट प्रकाशन पर रोक लगाई जाए और उनके लिए सीटें आरक्षित रखी जाएं। कोर्ट ने इस पर सहमति जताते हुए सीटें आरक्षित रखने का निर्देश दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त 2025 को होगी।

50% आरक्षण फिर भी असंतोष क्यों?

ज्ञात हो कि इस बहाली प्रक्रिया में पारा शिक्षकों को 50 प्रतिशत सीटों पर आरक्षण दिया गया है। इसके बावजूद असंतोष इसलिए है क्योंकि नॉर्मलाइजेशन से जुड़े तकनीकी बदलावों के कारण कई अनुभवी पारा शिक्षक चयन सूची से बाहर हो गए। ये शिक्षक वर्षों से झारखंड के स्कूलों में पढ़ा रहे हैं और इस भर्ती को अपनी स्थायी नियुक्ति का अंतिम मौका मान रहे थे।

JSSC की प्रक्रिया सवालों के घेरे में

अब यह मामला पूरी तरह न्यायालय के अधीन है और अगली सुनवाई के बाद ही यह तय होगा कि नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया को बहाल रखा जाएगा या उसमें बदलाव किया जाएगा।

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