संथाल परगना समेत झारखंड में बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ संघर्ष तेज
जामताड़ा: झारखंड में बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ आदिवासी समाज का संघर्ष तेज हो गया है। संथाल परगना समेत पूरे राज्य में इस मुद्दे पर कई संगठन एकजुट हो रहे हैं और इसे आदिवासी समाज के अस्तित्व की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण लड़ाई बताया जा रहा है।
सामाजिक आंदोलन को मिल रहा व्यापक समर्थन
इस संघर्ष को झारखंड के विभिन्न सामाजिक और आदिवासी संगठनों का सहयोग मिल रहा है। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक विरोध नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता की रक्षा के लिए एक बड़ा उलगुलान है, जिसके दूरगामी प्रभाव होंगे।

आंदोलन का अगला चरण जामताड़ा में
इस सामाजिक आंदोलन के अगले चरण में 23 मार्च को जामताड़ा के नगर भवन (दुलाडीह) में एक महत्वपूर्ण बैठक होगी। इस बैठक में आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी और लोगों को एकजुट होने का आह्वान किया गया है।
चंपई सोरेन ने किया समर्थन
बीजेपी विधायक चंपई सोरेन ने इस आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि यह केवल एक क्षेत्र का मुद्दा नहीं है, बल्कि झारखंड की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान बचाने का संघर्ष है। उन्होंने सभी आदिवासी समुदायों से इस लड़ाई में भागीदारी निभाने की अपील की।
