JSSC को 31.50 करोड़ की अतिरिक्त राशि, नियमों में भी बड़ा बदलाव: अब 50 हजार से अधिक आवेदनों पर होगी प्रारंभिक परीक्षा
🔹 प्रमुख बिंदु:
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JSSC को 2025-26 के लिए झारखंड आकस्मिकता निधि से ₹31.50 करोड़ की स्वीकृति
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स्नातक स्तर की परीक्षाओं के संचालन नियमों में अहम संशोधन
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50,000 से अधिक आवेदन होने पर होगी प्रारंभिक परीक्षा
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बहुविकल्पीय प्रश्न, हिंदी-अंग्रेजी माध्यम और नेगेटिव मार्किंग होगी लागू
प्रतियोगी परीक्षाओं को पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम
रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को राज्य सरकार ने आगामी वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षाओं के सुचारु आयोजन हेतु ₹31.50 करोड़ की अतिरिक्त राशि स्वीकृत की है। यह राशि झारखंड आकस्मिकता निधि (Jharkhand Contingency Fund – JCF) से दी गई है, जो इस बात को दर्शाता है कि सरकार अब प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, समयबद्धता और गुणवत्ता को लेकर गंभीर है।
नियमों में बड़ा बदलाव: अब 50 हजार से अधिक आवेदनों पर होगी प्रारंभिक परीक्षा
राज्य सरकार ने सिर्फ आर्थिक मदद ही नहीं दी, बल्कि JSSC स्नातक स्तरीय परीक्षा संचालन नियमावली 2015 में भी अहम संशोधन को मंजूरी दी है।
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संशोधित नियमों की मुख्य बातें:
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अगर किसी भर्ती परीक्षा में आवेदन 50,000 से अधिक होते हैं, तो आयोग प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) आयोजित करेगा।
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पहले सिर्फ मुख्य परीक्षा (Mains) के आधार पर चयन होता था।
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प्रश्न बहुविकल्पीय (Multiple Choice Questions – MCQ) होंगे।
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हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में प्रश्नपत्र उपलब्ध होंगे।
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परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग भी लागू होगी, जिससे अनावश्यक अनुमान आधारित उत्तरों को हतोत्साहित किया जा सकेगा।
युवाओं को मिलेगी पारदर्शी और स्पष्ट प्रक्रिया
इन बदलावों से प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेने वाले लाखों उम्मीदवारों को अधिक पारदर्शिता और स्पष्टता मिलेगी। प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा की प्रणाली चयन प्रक्रिया को और मजबूत बनाएगी। इसके साथ ही बहुभाषीय प्रश्नपत्र और निगेटिव मार्किंग से परीक्षा का स्तर भी ऊंचा होगा।
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नई प्रणाली से समयबद्ध और निष्पक्ष परीक्षा की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि नए नियमों के तहत परीक्षाएं अब ज्यादा समयबद्ध, डिजिटल रूप से नियंत्रित, और कदाचार मुक्त होंगी। सरकार का यह निर्णय JSSC की छवि को सुधारने और युवाओं का भरोसा वापस लाने में सहायक साबित हो सकता है।
राज्य सरकार ने वित्तीय और नीतिगत दोनों स्तरों पर JSSC को मज़बूती देने का काम किया है। अतिरिक्त बजट और नियमों में बदलाव से प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया अधिक संगठित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनने की उम्मीद है। इससे न सिर्फ युवाओं को लाभ होगा, बल्कि राज्य की प्रशासनिक गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
