Babulal Marandi allegations

बाबूलाल मरांडी का बड़ा आरोप: वांटेड अपराधी की डीजीपी कार्यालय तक पहुंच.

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बाबूलाल मरांडी का बड़ा आरोप: वांटेड अपराधी की डीजीपी कार्यालय तक पहुंच.

मुख्य बिंदु

  • भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पर गंभीर आरोप लगाए

  • वांटेड अपराधी राजेश राम के डीजीपी कार्यालय आने-जाने का दावा

  • वायरल ऑडियो में पुलिस कर्मी और कारोबारी से संपर्क की बात सामने आई

  • मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और डीजीपी पर सवाल खड़े किए

  • विपक्ष ने स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग दोहराई


मरांडी के आरोपों से बढ़ा सियासी तापमान

रांची, 22 सितंबर 2025- झारखंड की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पर एक लंबा पोस्ट शेयर करते हुए दावा किया है कि रामगढ़ पुलिस का वांटेड अपराधी राजेश राम जमानत पर बाहर रहने के बावजूद लगातार डीजीपी कार्यालय में आता-जाता रहा, लेकिन पुलिस ने उसे कभी गिरफ्तार नहीं किया।

मरांडी ने अपने पोस्ट में लिखा कि यह पूरा घटनाक्रम किसी फिल्मी कहानी जैसा लग सकता है, लेकिन हकीकत में यह झारखंड की प्रशासनिक स्थिति को उजागर करता है।

इंस्पेक्टर गणेश और सिपाही रंजीत राणा पर भी आरोप

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि राजेश राम की गिरफ्तारी के बाद इंस्पेक्टर गणेश सिंह ने भुरकुंडा थाना प्रभारी से संपर्क किया था। उनके मुताबिक, यही गणेश सिंह कथित तौर पर “अवैध डीजीपी” के संसाधन संग्रह टीम के अहम सदस्य हैं।

इसके अलावा, सोशल मीडिया पर वायरल एक ऑडियो क्लिप का भी जिक्र किया गया है। इसमें डीजीपी के करीबी बताए जाने वाले सिपाही रंजीत राणा के ओडिशा के एक कारोबारी से संपर्क साधने की कोशिश की बात सामने आई है। आरोप है कि इसी कारोबारी से 65 लाख रुपये की वसूली राजेश राम ने की थी।

रेक की कमी और आंदोलन से बाधित रेल परिचालन, यात्रियों को हो रही परेशानी.

मुख्यमंत्री और डीजीपी को घेरा

मरांडी ने सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और डीजीपी पर सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि—

  • “अवैध वसूली में आपकी कितनी हिस्सेदारी है?”

  • “शराब घोटाले की चार्जशीट समय पर दाखिल क्यों नहीं हुई?”

  • “अगर आपको फायदा नहीं मिला, तो जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?”

उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े वकीलों और राजनीतिक संरक्षण के दम पर मुख्यमंत्री और उनके करीबी लोग बार-बार बच निकलते हैं, लेकिन अंततः जांच एजेंसियां किसी को नहीं छोड़ेंगी

लालू प्रसाद का उदाहरण देकर चेताया

मरांडी ने अपने पोस्ट में चारा घोटाले का उदाहरण देते हुए कहा कि—
“तकनीक न होने के बावजूद 30 साल पहले घोटालेबाजों को सजा हुई थी। आज तकनीक और मजबूत है, ऐसे में आप यह कैसे मान बैठे हैं कि हमेशा बच निकलेंगे। लालू प्रसाद को भी आखिरकार सजा हुई। देर-सबेर सबका हिसाब होगा।”

विपक्ष की जांच की मांग

इन आरोपों के बाद झारखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। भाजपा नेताओं का कहना है कि मामले की CBI या स्वतंत्र एजेंसी से जांच होनी चाहिए ताकि सच सामने आ सके। वहीं सत्तारूढ़ दल की ओर से अब तक इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

झारखंड में अपराध, प्रशासन और राजनीति के बीच की कड़ी को लेकर विपक्ष लगातार सवाल खड़े कर रहा है। बाबूलाल मरांडी का यह ताजा हमला न केवल सरकार बल्कि पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। अब देखना होगा कि सरकार और मुख्यमंत्री इन आरोपों पर क्या रुख अपनाते हैं और जांच एजेंसियां किस दिशा में कदम बढ़ाती हैं।

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