Hemant Soren Babulal Marandi

बाबूलाल मरांडी का हमला – “एक पैसे की भी कटौती हुई तो सरकार का दाना-पानी बंद”

झारखंड/बिहार ताज़ा ख़बर विधानसभा चुनाव

हेमंत सरकार पर भाजपा का तीखा हमला: ‘धान बोनस में कटौती की तैयारी, किसानों से वादाखिलाफी’ 

मुख्य बिंदु:

  • झारखंड में धान बोनस में कटौती की तैयारी से किसानों में नाराजगी

  • चुनाव से पहले किए गए वादे से सरकार पर भरोसा टूटने का आरोप

  • भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार को घेरा

  • बोले – “किसानों के हक़ पर चोट बर्दाश्त नहीं होगी”

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रांची, 6 नवंबर 2025- झारखंड में धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर दी जाने वाली बोनस राशि में कटौती की चर्चा ने एक बार फिर सियासी माहौल गरमा दिया है। राज्य सरकार जहां वित्तीय समायोजन की दलील दे रही है, वहीं विपक्ष इसे किसानों के साथ “विश्वासघात” बता रहा है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सीधे निशाने पर लेते हुए लिखा —

“@HemantSorenJMM जी, अन्नदाता किसानों के हक़ पर चोट करना छोड़ दीजिए। अगर एक पैसे की भी कटौती की गई तो भाजपा आपकी सरकार का ‘दाना-पानी’ बंद कर देगी। किसानों के हक़ से कोई समझौता नहीं होगा।”

मरांडी का यह बयान ऐसे समय आया है जब सरकार की ओर से धान पर मिलने वाले बोनस में 19 रुपये प्रति क्विंटल की कटौती का प्रस्ताव सामने आया है।

वादे और हकीकत में फर्क:
भाजपा का कहना है कि चुनाव से पहले हेमंत सरकार ने किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदने का वादा किया था। लेकिन जब वास्तविक खरीद शुरू हुई तो किसानों को केवल 2400 रुपये प्रति क्विंटल का ही मूल्य मिला। अब इस राशि में और कटौती की संभावना जताई जा रही है, जिससे किसान समुदाय में असंतोष फैल गया है।

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भाजपा ने जताया किसानों के साथ विश्वासघात का आरोप
मरांडी ने कहा कि झारखंड के किसान पहले से ही मौसम की मार और लागत बढ़ने से परेशान हैं। ऐसे में सरकार द्वारा बोनस घटाने की योजना “किसान विरोधी सोच” को दर्शाती है। भाजपा ने साफ चेतावनी दी है कि अगर यह प्रस्ताव लागू किया गया, तो वे सड़क से लेकर विधानसभा तक आंदोलन करेंगे।

किसानों में नाराजगी और बेचैनी बढ़ी
राज्य के कई हिस्सों से किसान संगठनों ने भी सरकार के इस कदम का विरोध किया है। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई और घटते बाजार भाव के बीच बोनस ही उनके लिए राहत का माध्यम था। यदि उसमें भी कटौती की गई, तो उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ेगा।

राजनीतिक टकराव तेज होने के आसार
विश्लेषकों का मानना है कि, किसानों से जुड़े ऐसे निर्णय हेमंत सरकार के लिए राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं। भाजपा इस मुद्दे को “किसानों के सम्मान और अधिकार” से जोड़कर राज्यभर में प्रचारित करने की तैयारी में है।

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