बाबूलाल मरांडी का आरोप: ‘कैथलिक आदिवासी’ शब्द से गुमराह करने की साजिश।

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बाबूलाल मरांडी का आरोप: ‘कैथलिक आदिवासी’ शब्द के जरिए आदिवासी समाज को गुमराह करने की साजिश

मुख्य बिंदु- 

  • बाबूलाल मरांडी का आरोप: ईसाई धर्म में मतांतरण कर चुके लोग ‘कैथलिक आदिवासी’ जैसे शब्दों का उपयोग कर आदिवासी समाज को गुमराह करने की साजिश रच रहे हैं।

  • राजनीतिक स्वार्थ का आरोप: मरांडी ने कहा कि इन लोगों का उद्देश्य केवल आरक्षण का अनुचित लाभ प्राप्त करना है।

  • धर्म स्वतंत्रता की स्वीकृति: कैथलिक समुदाय को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता है, लेकिन आदिवासी समाज की पहचान को खतरे में डालने की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

  • आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान: आदिवासी समाज अपनी दिशा पारंपरिक श्रद्धा केंद्रों जैसे सरना स्थल और माँझी थान से तय करेगा।

  • आंदोलन की घोषणा: बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड में आदिवासी समाज को संगठित कर विदेशी साजिशों को नाकाम करने के लिए आंदोलन शुरू किया जाएगा।

  • प्रशासन से कार्रवाई की अपील: उन्होंने प्रशासन से इस मामले का संज्ञान लेने और संवैधानिक एवं कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई करने का अनुरोध किया।



भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने ईसाई धर्म में मतांतरण कर चुके लोगों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे ‘कैथलिक आदिवासी’ जैसे भ्रामक शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे आदिवासी समाज को गुमराह किया जा रहा है।

DGP Anurag Gupta Jharkhand Babulal Marandi press conference

मतांतरण और आरक्षण का अनुचित लाभ

मरांडी ने कहा कि कुछ लोग लालच, पैसे और राजनीतिक स्वार्थ के कारण ईसाई बन चुके हैं, लेकिन आरक्षण का लाभ उठाने के लिए खुद को आदिवासी बताकर संविधान और समाज दोनों के साथ छल कर रहे हैं।



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धार्मिक स्वतंत्रता, लेकिन साजिश बर्दाश्त नहीं

उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में हर किसी को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता है, लेकिन यदि किसी लोभ, भय या साजिश के तहत आदिवासी संस्कृति को मिटाने का प्रयास किया गया, तो उसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

आदिवासी समाज की दिशा: सनातन और सरना आस्था

मरांडी ने कहा कि आदिवासी समाज चर्च या मिशनरियों के फरमान से नहीं, बल्कि अपनी पारंपरिक आस्था – जैसे माँझी थान, सरना स्थल और जाहेर थान – के मूल्यों से ही मार्गदर्शन लेता है।

SHILPI NEHA TIRKEY

सांस्कृतिक पहचान बचाने के लिए आंदोलन की घोषणा

नेता प्रतिपक्ष ने यह भी घोषणा की कि झारखंड में जल्द ही आदिवासी समाज को संगठित कर विदेशी साज़िशों के खिलाफ एक व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा, ताकि उनकी सांस्कृतिक पहचान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की जा सके।

प्रशासन से कानूनी कार्रवाई की मांग

अंत में उन्होंने प्रशासन से अपील की कि वह इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए संविधान और कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करे।

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