बाबूलाल मरांडी का हमला, कांग्रेस ने 79 बार संविधान में बदलाव किया।

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संविधान की दुहाई देने वाली कांग्रेस खुद संविधान पर सबसे बड़ा खतरा: बाबूलाल मरांडी का तीखा हमला

प्रमुख बिंदु

  • कांग्रेस पर संविधान को बार-बार बदलने और लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने का आरोप

  • 79 बार संशोधन कर सत्ता और तुष्टिकरण के लिए संविधान का दुरुपयोग

  • आर्टिकल 35A से लेकर आपातकाल तक कांग्रेस की भूमिका पर सवाल

  • सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को पलटने और न्यायपालिका पर दबाव बनाने के आरोप

  • शाहबानो केस से लेकर राहुल गांधी की संसद में हरकत तक विस्तार से हमला

  • वक़्फ़ कानून, मुस्लिम आरक्षण और शरीयत बयान पर भी कांग्रेस को घेरा



कांग्रेस की संविधान बचाओ रैली पर पलटवार

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने रविवार को रांची स्थित प्रदेश कार्यालय में प्रेसवार्ता के दौरान कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस द्वारा आयोजित ‘संविधान बचाओ’ रैली को ढोंग करार देते हुए कहा कि, “संविधान की दुहाई देने वाली कांग्रेस ने ही संविधान की आत्मा को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है।”

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बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस पर किया तीखा हमला

संविधान में बार-बार संशोधन: सत्ता के लिए साजिश

मरांडी ने बताया कि कांग्रेस ने अपने 60 वर्षों के शासन में 79 बार संविधान संशोधित किया और इनमें से अधिकांश संशोधन केवल तुष्टिकरण और सत्ता में बने रहने की रणनीति के तहत किए गए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने संविधान को एक घोषणापत्र बना दिया था, जिसमें “मुस्लिम वोट बैंक” को ध्यान में रखकर नीतियाँ बनाई गईं।



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नेहरू का पहला प्रहार: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला

प्रेसवार्ता में बाबूलाल मरांडी ने पंडित नेहरू पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि, “भारत के पहले प्रधानमंत्री ने संविधान लागू होने के कुछ ही समय बाद प्रथम संविधान संशोधन करके अनुच्छेद 19(1)(a) को कमजोर किया और प्रेस की स्वतंत्रता पर पहला प्रहार किया। यह दर्शाता है कि उन्हें संविधान की मूल भावना की कितनी परवाह थी।”

अनुच्छेद 35A: असंवैधानिक ढंग से लागू

उन्होंने कश्मीर से जुड़े अनुच्छेद 35A को असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि यह संसद से पारित नहीं हुआ, बल्कि राष्ट्रपति के आदेश से जोड़ दिया गया। यह संविधान की प्रक्रिया का खुला उल्लंघन था और कांग्रेस की मनमानी का परिचायक है।

गैर-कांग्रेसी सरकारों को गिराने का इतिहास

मरांडी ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा लोकतंत्र को दबाने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “कांग्रेस ने चुनी हुई राज्य सरकारों को गिराने के लिए बार-बार अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग किया और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को ध्वस्त किया।”

सुप्रीम कोर्ट से टकराव: केशवानंद भारती केस

एक और महत्वपूर्ण बिंदु पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि गोलकनाथ केस में सुप्रीम कोर्ट ने मूल अधिकारों को छूने से मना किया था, लेकिन कांग्रेस ने दो-तिहाई बहुमत से 24वां संशोधन पारित कर अदालत के फैसले को पलट दिया।
इसी कड़ी में उन्होंने कहा, “1973 में इंदिरा गांधी ने तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों को दरकिनार कर ए.एन. रे को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया। यह न्यायपालिका पर खुला हमला था।”

आपातकाल और 42वां संशोधन: लोकतंत्र का काला अध्याय

उन्होंने याद दिलाया कि आपातकाल के दौरान कांग्रेस ने 42वां संविधान संशोधन पारित किया, जो इतना व्यापक था कि इसे ‘मिनी संविधान’ कहा गया। इसमें न्यायपालिका, संसद और नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर हमला किया गया।
“संविधान की आत्मा — प्रस्तावना — को बिना आम सहमति के बदल दिया गया और इसमें ‘समाजवादी’, ‘धर्मनिरपेक्ष’ जैसे शब्द जोड़ दिए गए,” उन्होंने कहा।

शाहबानो केस और मुस्लिम तुष्टिकरण

मरांडी ने कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टिकरण का भी आरोप लगाया और कहा, “शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट ने एक मुस्लिम महिला को गुज़ारा भत्ता देने का निर्णय दिया था, लेकिन राजीव गांधी सरकार ने एक विशेष कानून बनाकर यह फैसला पलट दिया। यह अनुच्छेद 14 यानी समानता के अधिकार का सीधा उल्लंघन था।”

संसद का अपमान: राहुल गांधी का व्यवहार

उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि संसद में कैबिनेट पेपर फाड़ना न केवल संसदीय मर्यादा का उल्लंघन है बल्कि संविधान की प्रक्रिया का भी अपमान है।

संवैधानिक संस्थाओं की अवहेलना और हिंसा

मरांडी ने कहा, “ED और कोर्ट जैसे संवैधानिक संस्थाओं के विरुद्ध कांग्रेस ने हिंसक प्रदर्शन किए, अधिकारियों को धमकाया और उन्हें जनता के खिलाफ खड़ा करने की कोशिश की। यह लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ है।”

शरीयत बनाम संविधान: कांग्रेस की चुप्पी

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों द्वारा कई बार शरीयत को संविधान से ऊपर बताया गया, जो संविधान की सर्वोच्चता पर सीधा हमला है। इसके अलावा वक़्फ़ कानून और मुस्लिम आरक्षण जैसे मुद्दों पर कांग्रेस की भूमिका भी संदिग्ध रही है।

अंत में मांग: कांग्रेस देश से मांगे माफी

अपने संबोधन के अंत में मरांडी ने कहा कि “कांग्रेस पार्टी को संविधान के खिलाफ किए गए अपने कार्यों के लिए देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए।”

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