📌 मुख्य बिंदु-
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बाबूलाल मरांडी ने रिम्स निदेशक की बर्खास्तगी को बताया राजनीतिक दबाव का नतीजा
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स्वास्थ्य मंत्री और सचिव पर अनुचित भुगतान का दबाव डालने का आरोप
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निदेशक डॉ. राजकुमार ने विरोध करते हुए इस्तीफे की दी थी पेशकश
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बाबूलाल बोले – रिम्स बन गया है भ्रष्टाचार का अड्डा
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सरकार की नीयत पर उठे सवाल, शासी परिषद की भूमिका पर भी प्रश्न
💥 रिम्स निदेशक की बर्खास्तगी पर बाबूलाल मरांडी का तीखा हमला
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार को पद से हटाए जाने पर राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने इसे एक ईमानदार अधिकारी के खिलाफ बदले की भावना से की गई कार्रवाई करार दिया।

🏥 रिम्स में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने की मिली सजा
मरांडी ने कहा कि हाल ही में रिम्स शासी परिषद की बैठक में निदेशक ने स्वास्थ्य मंत्री और विभागीय अधिकारियों द्वारा निजी डायग्नोस्टिक सेंटर्स को बिना किसी वैध अनुबंध के करोड़ों रुपये का भुगतान करने के दबाव का विरोध किया था। जब उन्होंने इस दबाव को मानने से इनकार किया, तो उन्हें पद से हटा दिया गया।
🧾 शासी परिषद की गरिमा पर उठे सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि विभागीय सचिव ने शासी परिषद की बैठक में असंवैधानिक व्यवहार करते हुए उसकी गरिमा को भी ठेस पहुंचाई। निदेशक ने बैठक के दौरान विरोध में अपना इस्तीफा देने तक की बात कह दी थी। इसके बावजूद सरकार ने उन्हें हटा दिया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि सरकार केवल भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना चाहती है।
🤝 अगर सलाह नहीं माननी तो शासी परिषद को भंग करे सरकार
मरांडी ने कहा कि अगर सरकार को शासी परिषद की राय का कोई मूल्य नहीं देना है तो औपचारिक बैठकों का ढोंग करने के बजाय परिषद को ही भंग कर देना चाहिए। इससे पहले भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कार्यकाल में कई रिम्स निदेशक दबाव के चलते इस्तीफा दे चुके हैं।
💰 “रिम्स बन चुका है संगठित भ्रष्टाचार का केंद्र” – मरांडी
उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रिम्स जैसे राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल को संगठित भ्रष्टाचार का केंद्र बना दिया है। इस तरह की कार्रवाई से यह साफ है कि जो भी ईमानदारी से काम करेगा, उसे पद से हटा दिया जाएगा।
