गुमला में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई बाबा जतरा टाना भगत की जयंती
गुमला : बिशुनपुर प्रखंड के ऐतिहासिक गाँव चिंगरी नवाटोली में रविवार को आदिवासी स्वाभिमान और आस्था का अद्वितीय संगम देखने को मिला।
हजारों की संख्या में जुटे टाना भगत अनुयायियों ने सत्य और अहिंसा के महान योद्धा, टाना आंदोलन के जनक एवं स्वतंत्रता सेनानी बाबा जतरा टाना भगत की जयंती श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई।

अनुयायियों का अनुशासित जत्था
राज्य के विभिन्न जिलों से आए अनुयायी पारंपरिक परिधानों और अनुशासित जीवनशैली के साथ एक दिन पूर्व ही चिंगरी पहुँच गए थे। गाँव की गलियाँ और प्रांगण भगवा, सफेद और हरे रंग के ध्वजों व नारों से गूंज उठे।

शपथ ग्रहण समारोह
कार्यक्रम के दौरान पड़हा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से चयनित नए पदाधिकारियों ने शपथ ग्रहण किया। समारोह की अध्यक्षता जनार्दन टाना भगत ने की।
बाबा जतरा का जीवन और आंदोलन
28 सितम्बर 1888 को जन्मे जतरा उराँव (बाबा जतरा टाना भगत) ने अंग्रेजी शासन और ज़मींदारी शोषण के खिलाफ टाना आंदोलन की नींव रखी। उन्होंने 1912 से सामाजिक कुरीतियों का विरोध करते हुए शराबबंदी और पशुबलि त्याग का संदेश दिया। उनका आंदोलन सत्य, अहिंसा और स्वदेशी के रास्ते पर आगे बढ़ा और महात्मा गांधी के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ गया।
1914 में अंग्रेजी हुकूमत ने उन्हें जेल में डाल दिया, लेकिन उनका संघर्ष आगे बढ़ता रहा। टाना भगतों ने कर न देने और बेगार प्रथा के खिलाफ व्यापक आंदोलन चलाया। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भी उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही।
नेताओं और विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति
समारोह में CRPF के DIG रविन्द्र भगत, सामाजिक कार्यकर्ता अनिल अमिताभ पन्ना, राजी देवान बसंत कुमार भगत, सचिव राजेश टाना भगत सहित कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बाबा को श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी ने एक स्वर में कहा कि बाबा जतरा का त्याग और विचारधारा आज भी आदिवासी समाज और राष्ट्र के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
उमड़ा जनसैलाब
जयंती के अवसर पर समाधि स्थल और पूरे गाँव में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। उपस्थित अतिथियों और अनुयायियों ने इसे केवल स्मृति दिवस नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को सत्य, त्याग और स्वतंत्रता का शाश्वत संदेश देने का संकल्प दिवस बताया।
