मुख्य बिंदु
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1961 में एमनेस्टी इंटरनेशनल की स्थापना, जो आज 70 लाख से अधिक समर्थकों का संगठन है
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नेल्सन मंडेला की रिहाई, मृत्युदंड के खिलाफ अभियान और मानवाधिकार की वैश्विक आवाज
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28 मई को वीर सावरकर की जयंती और एमनेस्टी इंटरनेशनल डे के रूप में मनाया जाता है
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भारत, रूस, पाकिस्तान, नेपाल सहित कई देशों में इस दिन घटीं ऐतिहासिक घटनाएं
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अनेक महापुरुषों का जन्म व पुण्यतिथि, जिन्होंने इतिहास में अमिट छाप छोड़ी
आज, कल और भविष्य का संबंध इतिहास से
‘आज वर्तमान है, कल बीता हुआ समय है और दूसरा कल आने वाला समय।’ यह पंक्ति केवल एक विचार नहीं, बल्कि समय को समझने की कुंजी है। इतिहास केवल स्मृति नहीं बल्कि वर्तमान को दृष्टि और भविष्य को दिशा देने वाला दर्पण है। इसलिए 28 मई जैसे महत्वपूर्ण दिन को जानना हमारे ज्ञान और चेतना को व्यापक बनाता है।
मानवाधिकारों की रक्षा का इतिहास: एमनेस्टी इंटरनेशनल की स्थापना
28 मई 1961 को एमनेस्टी इंटरनेशनल की नींव रखी गई थी। इसकी शुरुआत दो पुर्तगाली छात्रों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए जेल भेजे जाने के विरोध में ब्रिटिश वकील पीटर बेनेन्सन द्वारा की गई थी। उन्होंने ‘ऑब्जर्वर’ अखबार में ‘अपील फॉर एमनेस्टी’ शीर्षक से लेख लिखा और यह आवाज जल्द ही एक अंतरराष्ट्रीय आंदोलन बन गई।
70 लाख से अधिक समर्थक, एक उद्देश्य
आज एमनेस्टी इंटरनेशनल एक ऐसा संगठन है जो दुनिया भर में मानवाधिकारों के लिए कार्य करता है। यह संगठन उन लोगों की आवाज बन चुका है जो अन्याय, दमन और उत्पीड़न का शिकार हुए हैं।
हर सरकार जवाबदेह
एमनेस्टी का मानना है कि कोई भी सरकार जांच से परे नहीं है। इसके प्रयासों का ही परिणाम है कि आज 140 से अधिक देशों ने मृत्युदंड को समाप्त कर दिया है।
ऐतिहासिक उपलब्धियां और वैश्विक प्रभाव
अंतरात्मा की आवाज से शुरू हुआ सफर
1963 में साइबेरिया की जेल से यूक्रेनी आर्कबिशप जोसेफ स्लिपी की रिहाई इसका पहला बड़ा कदम था।
अत्याचार के विरुद्ध पहला अभियान
1972 में इस संगठन ने दुनिया भर में हो रहे अत्याचारों के खिलाफ पहला वैश्विक अभियान शुरू किया। इसके समर्थन में संयुक्त राष्ट्र 1984 में आगे आया।
नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित
1977 में एमनेस्टी को ‘शांति, स्वतंत्रता और न्याय’ के लिए नोबेल शांति पुरस्कार मिला।
मृत्युदंड के खिलाफ वैश्विक आंदोलन
1980 में मृत्युदंड हटाने के लिए वैश्विक अभियान चला। इसका असर ये हुआ कि 2014 तक अधिकांश देशों ने इसे समाप्त कर दिया।
नेल्सन मंडेला और इंटरनेट की आजादी तक
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने नेल्सन मंडेला की रिहाई के लिए भी जबरदस्त अभियान चलाया था। यही नहीं, 21वीं सदी में संगठन ने इंटरनेट पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को भी अपनी लड़ाई का हिस्सा बनाया।
सीरिया में लोकतंत्र समर्थक लेखक की रिहाई
अली सैयद अल-शिहाबी जैसे कई एक्टिविस्ट्स की रिहाई एमनेस्टी की वैश्विक दबाव नीति के कारण संभव हुई।
हथियारों की संधि और मानवता की जीत
24 दिसंबर 2014 को वैश्विक शस्त्र व्यापार संधि लागू हुई। यह संधि दुनिया भर में हिंसा और अत्याचार फैलाने वाले हथियारों के व्यापार को रोकने में मदद करती है।
आज का दिन: और क्या-क्या हुआ इतिहास में
महत्वपूर्ण घटनाएं:
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1414: खिज्र खां ने सैय्यद वंश की नींव रखी
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1952: यूनान में महिलाओं को मताधिकार मिला
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1959: अमेरिका ने दो बंदरों को अंतरिक्ष में भेजा
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1963: बंगाल की खाड़ी में चक्रवात से 22 हजार की मौत
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1965: धनबाद की खदान में विस्फोट, 400 की जान गई
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1998: पाकिस्तान ने पहला परमाणु परीक्षण किया
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2008: नेपाल में राजशाही समाप्त हुई
28 मई को जन्मे महान व्यक्तित्व
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1883: वीर सावरकर – क्रांतिकारी, कवि, दार्शनिक
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1923: एनटी रामाराव – अभिनेता, राजनेता
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1940: प्रयाग शुक्ल – हिन्दी कवि, अनुवादक
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1952: पिनाकी चन्द्र घोष – भारत के पहले लोकपाल
28 मई को दिवंगत महान व्यक्तित्व
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1954: विजय सिंह पथिक – स्वतंत्रता सेनानी
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1964: महबूब खान – भारतीय सिनेमा निर्माता-निर्देशक
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2005: गोपाल प्रसाद व्यास – साहित्यकार
आज के विशेष दिवस
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वीर सावरकर जयंती
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एमनेस्टी इंटरनेशनल डे
निष्कर्ष
28 मई केवल एक तारीख नहीं, बल्कि इतिहास में मानवाधिकारों, न्याय, स्वतंत्रता और संघर्ष की अमिट गाथा है। वीर सावरकर की जयंती से लेकर एमनेस्टी इंटरनेशनल की स्थापना तक, यह दिन हमें सिखाता है कि आवाज उठाना, अन्याय के खिलाफ खड़े होना और स्वतंत्रता की रक्षा करना, हर युग में जरूरी रहा है। इतिहास को जानकर ही हम वर्तमान को समझ सकते हैं और भविष्य को बेहतर बना सकते हैं।
