सीमावर्ती तनाव के बीच झामुमो ने रोकी सरना कोड की मांग पर प्रस्तावित रैली।

झारखंड/बिहार विधानसभा चुनाव

मुख्य बिंदु:

  • 9 मई को होने वाला झामुमो का राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन स्थगित

  • सरना धर्म कोड को लेकर था प्रस्तावित आंदोलन

  • देश की सीमाओं पर तनाव को देखते हुए पार्टी का फैसला

  • झारखंड विधानसभा 2020 में पारित कर चुकी है सरना धर्म कोड का प्रस्ताव

  • केंद्र सरकार से अब तक नहीं मिली स्वीकृति



झामुमो ने स्थगित किया 9 मई का विरोध प्रदर्शन

रांची। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने 9 मई को होने वाला राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन फिलहाल स्थगित कर दिया है। यह प्रदर्शन सरना आदिवासी धर्म कोड को जनगणना के धर्म कॉलम में शामिल कराने की मांग को लेकर आयोजित होना था।

सीमावर्ती हालात को देखते हुए लिया फैसला

झामुमो के महासचिव व प्रवक्ता विनोद कुमार पांडेय ने गुरुवार को कैंप कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि देश की सीमाओं पर उत्पन्न तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए पार्टी ने यह निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि वीरभूमि झारखंड की जनता और झामुमो, दोनों देश के वीर जवानों के साथ मजबूती से खड़े हैं। सीमा पार से संचालित किसी भी प्रकार के आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।



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पहले था ऐलान: सरना कोड के बिना नहीं होगी जनगणना

गौरतलब है कि इससे पहले झामुमो ने यह स्पष्ट कर दिया था कि जब तक सरना आदिवासी धर्म कोड को मान्यता नहीं दी जाएगी, तब तक राज्य में जनगणना प्रक्रिया को नहीं चलने दिया जाएगा। पार्टी ने इसे झारखंड के आदिवासियों की धार्मिक पहचान और अधिकार से जुड़ा मुद्दा बताया था।

विधानसभा ने पहले ही पारित कर दिया है प्रस्ताव

उल्लेखनीय है कि झारखंड विधानसभा ने 11 नवंबर 2020 को एक विशेष सत्र में सर्वसम्मति से ‘सरना आदिवासी धर्म कोड’ का प्रस्ताव पारित किया था। इस प्रस्ताव का उद्देश्य 2021 की जनगणना में सरना धर्म को मानने वालों को अलग धार्मिक पहचान दिलाना था। सरना धर्म के अनुयायी प्रकृति पूजक होते हैं और वे स्वयं को हिंदू धर्म का हिस्सा नहीं मानते।



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केंद्र सरकार की ओर से नहीं मिला जवाब

प्रस्ताव को पारित कर राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को भेजा था, लेकिन अब तक इस पर केंद्र से कोई स्पष्ट निर्णय या प्रतिक्रिया नहीं मिली है। इससे आदिवासी समुदाय में असंतोष व्याप्त है और झामुमो इस मुद्दे को लगातार राष्ट्रीय स्तर पर उठाता रहा है।

आंदोलन स्थगन के साथ जिलाध्यक्षों को वापस बुलाया गया

अब जब विरोध प्रदर्शन स्थगित कर दिया गया है, पार्टी ने सभी जिला अध्यक्षों, सचिवों और केंद्रीय समिति के पदाधिकारियों को इस बाबत पहले जारी किए गए निर्देश वापस ले लिए हैं।

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