ओबीसी सलाहकार परिषद की बैठक में शामिल हुईं अंबा प्रसाद, बोलीं – “हक और हिस्सेदारी के लिए लड़ाई जारी रहेगी”
मुख्य बिंदु:
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कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया के आमंत्रण पर बेंगलुरु में हुआ ओबीसी सलाहकार परिषद का आयोजन
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कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव अंबा प्रसाद ने झारखंड से की भागीदारी
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झारखंड कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और विधायक प्रदीप यादव भी रहे उपस्थित
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अंबा प्रसाद ने जातिगत जनगणना और ओबीसी नेताओं की भागीदारी को बताया अहम मुद्दा
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ओबीसी वर्ग के वोटर्स को बताया देश की राजनीति में निर्णायक शक्ति
बेंगलुरु में ओबीसी सलाहकार परिषद की बैठक आयोजित
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के आमंत्रण पर बेंगलुरु में आयोजित ओबीसी सलाहकार परिषद की बैठक में झारखंड से कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव एवं पश्चिम बंगाल की सह प्रभारी अंबा प्रसाद ने भाग लिया। यह बैठक सामाजिक न्याय और ओबीसी समुदाय से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
झारखंड से वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने की उपस्थिति
बैठक में झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव भी शामिल हुए। अंबा प्रसाद के बेंगलुरु आगमन पर कर्नाटक कांग्रेस के पदाधिकारियों ने हवाई अड्डे पर परंपरागत स्वागत किया।
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कांग्रेस की रणनीति में ओबीसी समुदाय की अहम भूमिका
गौरतलब है कि कांग्रेस हाईकमान ने हाल ही में एक ओबीसी समिति का गठन किया है, जिसमें शीर्ष नेताओं को शामिल किया गया है। इस समिति की जिम्मेदारी ओबीसी वर्ग से जुड़े डेटा का संग्रह, उनके मुद्दों की पहचान और राजनीतिक रणनीति को आकार देना है।
विशेषज्ञों और ओबीसी संगठनों के अनुसार, भारत की आबादी में ओबीसी समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 55-60 प्रतिशत है। देशभर में करीब 96 जातियां इस वर्ग में आती हैं, जिससे उनका राजनीतिक महत्व काफी बढ़ जाता है।
अंबा प्रसाद ने जताई जातिगत जनगणना की जरूरत
इस मौके पर अंबा प्रसाद ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि –
“ओबीसी समाज से आने वाले नेताओं को जमीनी स्तर से लेकर प्रदेश नेतृत्व तक बड़ी जिम्मेदारी देना जरूरी है।”
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वह लगातार जातिगत जनगणना की मांग करती रही हैं और यह बैठक उसी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।
“हक और हिस्सेदारी” की बात से मजबूत हो रहा एजेंडा
अंबा प्रसाद ने कहा कि उनका उद्देश्य ओबीसी समुदाय के हक और हिस्सेदारी की बात को राष्ट्रीय विमर्श में लाना है। जातिगत जनगणना और समाज के प्रतिनिधित्व को लेकर वे लगातार आवाज उठा रही हैं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ सामाजिक न्याय की बात नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संतुलन की भी मांग है।
ओबीसी वोट बैंक को साधने और सामाजिक न्याय की दिशा में कांग्रेस की बढ़ती सक्रियता के संकेत इस बैठक के जरिए स्पष्ट दिखाई दिए। अंबा प्रसाद जैसे युवा नेता इस मुहिम को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की कोशिश में जुटे हैं, जिससे आगामी चुनावों में इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।
