स्टारलिंक को भारत में अनुमति देना राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ: CPIM.

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स्टारलिंक को भारत में अनुमति देना राष्ट्रीय हितों के विरुद्ध: माकपा का केंद्र सरकार पर बड़ा हमला

🔹 मुख्य बिंदु:

  • माकपा ने स्टारलिंक की भारत में अनुमति को बताया राष्ट्रहित और सुरक्षा के लिए घातक

  • पारदर्शिता के अभाव और संसदीय निगरानी की कमी पर उठाए गंभीर सवाल

  • LEO स्पॉट्स का विदेशी कंपनी को आवंटन बताया रणनीतिक आत्मनिर्भरता पर हमला

  • BSNL जैसे सार्वजनिक उपक्रमों के अस्तित्व को बताया खतरे में

  • ट्राई और IN-SPACe के फैसले पर भी सवालिया निशान

  • केंद्र से स्टारलिंक अनुमति रद्द करने, लोकसभा समीक्षा और स्वदेशी निवेश की मांग



राष्ट्रीय संप्रभुता पर खतरा: माकपा का आरोप

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को भारत में परिचालन की अनुमति देने पर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की है। माकपा का कहना है कि यह निर्णय भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, डिजिटल संप्रभुता और स्वदेशी संसाधनों की रक्षा के खिलाफ है।

पार्टी ने दावा किया कि यह कदम देश की रणनीतिक दूरसंचार संरचना को अमेरिकी प्रभाव के लिए खुला छोड़ देता है और सरकार ने बिना पारदर्शी प्रक्रिया और संसद की निगरानी के यह अनुमति दी है।

अंतरिक्ष संसाधनों का विदेशी हस्तांतरण

माकपा ने सवाल उठाया कि स्टारलिंक को लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में जो स्पॉट्स आवंटित किए गए हैं, वे दुर्लभ और स्थायी संसाधन हैं जिन्हें वापस लेना लगभग असंभव है। ऐसे में यह आवंटन भारत के दीर्घकालिक रणनीतिक हितों को नुकसान पहुंचाता है, और इसे विदेशी कंपनियों को सौंपना राष्ट्रहित के खिलाफ है।

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आत्मनिर्भर भारत के सिद्धांत की अनदेखी

पार्टी ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में आत्मनिर्भर भारत के लिए प्रतिबद्ध होती, तो इसरो, C-DOT और डॉट जैसी स्वदेशी संस्थाओं को प्राथमिकता दी जाती। भारत के पास उपग्रह संचार (SATCOM) में नवाचार की बड़ी संभावनाएं हैं, जिन्हें प्रोत्साहित करने के बजाय विदेशी निजी कंपनियों को प्राथमिकता दी जा रही है।

स्पेक्ट्रम शुल्क में छूट और राजकोषीय नुकसान

माकपा ने यह भी खुलासा किया कि TRAI ने स्टारलिंक से केवल 4% स्पेक्ट्रम यूसेज फीस लेने का निर्णय लिया है, वह भी बिना अग्रिम शुल्क के। इससे न केवल सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचेगा बल्कि सौदे की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े होते हैं

इसके अलावा, भारत के अंतरिक्ष नियामक IN-SPACe ने किन शर्तों पर स्टारलिंक को अनुमति दी, इसकी जानकारी आज भी गोपनीय है।

BSNL के अस्तित्व पर संकट

पार्टी ने आशंका जताई कि स्टारलिंक का रिलायंस जियो और भारती एयरटेल के साथ संभावित गठजोड़ द्वैधाधिकार (duopoly) की स्थिति उत्पन्न करेगा, जिससे BSNL जैसे सार्वजनिक उपक्रम की स्थिति और कमजोर होगी।
BSNL आज भी भारत के ग्रामीण, आदिवासी और सुदूर इलाकों में सस्ते दर पर इंटरनेट और संचार सुविधा प्रदान करता है। इसे कमजोर करना डिजिटल न्याय और समानता के विरुद्ध है।

माकपा की स्पष्ट मांगें:

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने केंद्र सरकार से निम्नलिखित मांगें की हैं:

  1. स्टारलिंक की अनुमति को तत्काल रद्द किया जाए

  2. संपूर्ण निर्णय की संसदीय समीक्षा करवाई जाए

  3. दूरसंचार और अंतरिक्ष क्षेत्र में स्वदेशी सार्वजनिक निवेश को प्राथमिकता दी जाए

माकपा का आरोप है कि स्टारलिंक को अनुमति देना न सिर्फ तकनीकी और रणनीतिक संसाधनों का हस्तांतरण है, बल्कि यह भारत की राजनीतिक, आर्थिक और डिजिटल संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा है। पार्टी ने इस फैसले को न सिर्फ गलत बताया, बल्कि इसे “बर्दाश्त नहीं किया जा सकने वाला” करार दिया है।

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