Ramgarh Tender Scam

रामगढ़ और हजारीबाग में टेंडर घोटाले का आरोप, CPI ने की CBI जांच की मांग.

झारखंड/बिहार विधानसभा चुनाव

रामगढ़ और हजारीबाग में टेंडर घोटाले का आरोप, भाकपा नेता महेंद्र पाठक ने की सीबीआई जांच की मांग

मुख्य बिंदु:

  • रामगढ़ ग्रामीण विकास प्रमंडल में नौ टेंडरों में से आठ एक ही ठेकेदार विंध्याचल कंस्ट्रक्शन को दिए गए

  • हजारीबाग जिले में भी टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता, एक साल बाद भी टेंडर नहीं खोला गया

  • भाकपा नेता महेंद्र पाठक ने मुख्यमंत्री, ग्रामीण विकास मंत्री और चीफ इंजीनियर को पत्र लिखकर जांच की मांग की

  • नियमों की अनदेखी कर मनमाने तरीके से ठेकेदारों को काम सौंपने का आरोप

  • पूरे झारखंड में टेंडर प्रक्रिया की सीबीआई जांच की मांग



रामगढ़ में टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल

रामगढ़, 29 जुलाई 2025– जिले के ग्रामीण विकास प्रमंडल में टेंडर प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रदेश सचिव महेंद्र पाठक ने आरोप लगाया है कि रामगढ़ के कार्यपालक अभियंता ने नौ टेंडरों में से आठ टेंडर एक ही ठेकेदार — विंध्याचल कंस्ट्रक्शन — को मनमाने ढंग से सौंप दिए। ये सभी टेंडर विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पीसीसी पथ निर्माण के लिए निकाले गए थे।

विधानसभा चुनाव से पहले बंटे टेंडर, सवालों के घेरे में प्रक्रिया

महेंद्र पाठक के अनुसार ये सभी टेंडर एक ही दिन निकाले गए थे और लगभग सभी एक ही ठेकेदार को दिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यपालक अभियंता ने अपने पसंदीदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए पूरी प्रक्रिया को पहले से ही निर्धारित कर रखा था। उन्होंने यह भी दावा किया कि कर्मा पंचायत के श्याम बागी से हार्वे तक 2.6 किलोमीटर पीसीसी पथ निर्माण का बचा हुआ टेंडर भी उसी ठेकेदार को देने की तैयारी है, जिसकी अनुमानित लागत ₹2.32 करोड़ है।

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हजारीबाग में भी टेंडर घोटाले के संकेत

पाठक ने केवल रामगढ़ ही नहीं, बल्कि हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ प्रखंड में भी टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि ग्राम चटकारी से उचरिंगा भैया रोहनियाटांड़ तक के निर्माण कार्य के लिए साल भर पहले टेंडर निकाला गया था, जिसमें दस संवेदकों ने भाग लिया था। लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बावजूद टेंडर नहीं खोला गया। पाठक का आरोप है कि अधिकारी अब तक सबसे ज्यादा बोली लगाने वाले ठेकेदार की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिससे प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्न उठते हैं।

नियमों की हो रही अनदेखी

भाकपा नेता ने बताया कि नियमानुसार किसी भी टेंडर को छह महीने के भीतर खोला जाना चाहिए, वरना उसे रद्द करना अनिवार्य होता है। लेकिन ग्रामीण विकास विभाग में नियमों को ताक पर रखकर, मनचाहे ठेकेदारों को लाभ देने की कोशिश की जा रही है। पाठक ने यह भी कहा कि इससे पहले वर्ष 2024 में भी क्लासिक कंस्ट्रक्शन नामक एक ही ठेकेदार को बड़े प्रोजेक्ट्स मनमाने ढंग से सौंपे गए थे।

मुख्यमंत्री को पत्र, CBI जांच की मांग

महेंद्र पाठक ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, ग्रामीण विकास मंत्री, और विभाग के चीफ इंजीनियर को पत्र लिखकर पूरे मामले की CBI जांच की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि एक ही ठेकेदार को बार-बार काम सौंपने से कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और जनता में भारी असंतोष है।

पाठक ने कहा कि टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता और कार्यों का समुचित बंटवारा जरूरी है ताकि विकास कार्य गुणवत्तापूर्ण और निष्पक्ष तरीके से हो सके। वर्तमान हालात में अधिकारी दो चुनिंदा ठेकेदारों की “जेब में” काम करा रहे हैं, जिससे सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग और जनता के साथ धोखा हो रहा है।

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