सेंट जेवियर्स कॉलेज और आश्रयणी फाउंडेशन के बीच नवजात संरक्षण पर समझौता.

झारखंड/बिहार

सेंट जेवियर्स कॉलेज और आश्रयणी फाउंडेशन के बीच ऐतिहासिक MoU, नवजात संरक्षण को मिलेगा संस्थागत समर्थन

प्रमुख बिंदु:

  • झारखंड में पहली बार कॉलेज स्तर पर नवजात संरक्षण को लेकर समझौता

  • ‘पा-लो-ना’ अभियान के तहत समाज में बदलाव और जागरूकता का लक्ष्य

  • सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDGs) के पांचवें बिंदु का अनुपालन

  • छात्र-छात्राओं को इंटर्नशिप, शोध और सामाजिक कार्यों से जोड़ने की पहल



रांची में हुआ ऐतिहासिक समझौता

रांची- झारखंड में नवजात शिशुओं की हत्या, लावारिस छोड़े जाने और सुरक्षित संरक्षण जैसे गंभीर मुद्दों पर अब शिक्षण संस्थान भी पहल कर रहे हैं। इसी दिशा में सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची और आश्रयणी फाउंडेशन (जो “पा-लो-ना” अभियान चला रही है) ने एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।

समाज के प्रति विद्यार्थियों की भागीदारी को मिलेगा बल

इस समझौते का उद्देश्य छात्रों को शोध, सामाजिक जागरूकता, मानसिक स्वास्थ्य और कानूनी प्रक्रियाओं से जोड़ना है, ताकि नवजात संरक्षण पर एक व्यापक और संवेदनशील समझ विकसित की जा सके। यह पहल भारत में संभवतः पहली बार किसी कॉलेज द्वारा इस विषय पर की गई है, जो कि सामाजिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण कदम है।

रांची में 15 जून को आरटीआई वर्कशॉप, 15 जिलों के प्रतिभागी होंगे शामिल.

SDG लक्ष्य और बेटियों की रक्षा का संदेश

यह साझेदारी भारत सरकार द्वारा तय सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDG-5: लैंगिक समानता) के अनुपालन की दिशा में एक सशक्त प्रयास है। साथ ही, यह ‘बेटी बचाओ’ जैसे अभियानों को भी मजबूत करेगा। इस समझौते के तहत हर नवजात, चाहे वह लड़का हो या लड़की, को समान अधिकार और संरक्षण देने की बात की गई है।

MoU हस्ताक्षर में प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति

इस MoU पर कॉलेज के प्राचार्य फादर डॉ. रॉबर्ट प्रदीप कुजूर एसजे और आश्रयणी फाउंडेशन की सीईओ मोनिका गुंजन आर्य ने हस्ताक्षर किए।
इस मौके पर कॉलेज की ओर से उप प्राचार्य फादर डॉ. अजय मिन्ज, डॉ. वेंकट अप्पा राव, और डॉ. कैप्टन प्रिया श्रीवास्तव उपस्थित थे। वहीं फाउंडेशन की ओर से संगीता कुजारा टाक, अधिवक्ता आरती वर्मा, श्वेता अग्रवाल और संगीता सिन्हा मौजूद थीं।

छात्रों को मिलेंगे प्रशिक्षण और शोध के अवसर

इस समझौते के बाद अब पत्रकारिता, जनसंचार, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, कानून और मानव अध्ययन विभागों के छात्र इस विषय पर इंटर्नशिप, केस स्टडी, और सामाजिक अभियान का हिस्सा बन सकेंगे। साथ ही उन्हें ‘हर शिशु है महत्वपूर्ण’ जैसे संवेदनशील विषयों पर काम करने का अवसर मिलेगा।

नवजातों के हक और मातृत्व को मिलेगा सम्मान

इस साझेदारी के माध्यम से माताओं की मानसिक स्थिति, नवजात के अधिकार, और बच्चे को सुरक्षित तरीके से सरकारी संरक्षण में सौंपने जैसे मुद्दों को शिक्षा का हिस्सा बनाया जाएगा। इससे समाज में संवेदनशीलता और जागरूकता को बल मिलेगा।

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