रांची- झारखंड के गोड्डा जिले से एक गंभीर मानवीय मामला सामने आया है, जिसे लेकर राज्य सरकार की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े हो गए हैं। गोड्डा निवासी अमित मंडल दिव्यांग हैं और चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हैं। अपने लिए ट्राईसाइकिल या इलेक्ट्रिक व्हीलचेयर की उम्मीद में वे बीते एक महीने में तीन बार प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन हर बार अधिकारी की अनुपस्थिति का हवाला देकर उन्हें वापस लौटा दिया गया।

मामले को और गंभीर बनाता है यह तथ्य कि अमित मंडल की दिव्यांग पेंशन भी पिछले छह महीनों से बंद है। परिजनों द्वारा कई बार संबंधित अधिकारियों से संपर्क और गुहार लगाने के बावजूद अब तक पेंशन भुगतान शुरू नहीं हो सका है। इससे परिवार आर्थिक संकट और मानसिक तनाव दोनों से जूझ रहा है।
इस पूरे मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति हेमंत सोरेन सरकार की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा को दर्शाती है। सरकार ‘सरकार आपके द्वार’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए जनता को राहत देने का दावा करती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि ज़रूरतमंदों को आज भी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
बाबूलाल मरांडी ने गोड्डा जिला प्रशासन से इस मामले का संज्ञान लेने की मांग करते हुए कहा कि दिव्यांग अमित मंडल को शीघ्र बैटरी चालित ट्राईसाइकिल या इलेक्ट्रिक व्हीलचेयर उपलब्ध कराई जाए, उनकी लंबित दिव्यांग पेंशन का तत्काल भुगतान सुनिश्चित हो और इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
यह मामला न केवल प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करता है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि सरकारी योजनाएं वास्तव में ज़रूरतमंदों तक क्यों नहीं पहुंच पा रही हैं।
