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24 घंटे का “पावर गेम”! ट्रांसपोर्ट सचिव ने खुद को बनाया कमिश्नर?

झारखंड/बिहार ताज़ा ख़बर विधानसभा चुनाव

झारखंड की सियासत में एक बार फिर प्रशासनिक पारदर्शिता और नियमों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए एक नए मामले को सार्वजनिक किया है।

भाजपा का सरकार पर सीधा हमला

भाजपा  के प्रदेश प्रवक्ता Ajay Sah ने प्रेस वार्ता के दौरान झारखंड सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि राज्य में नियमों की अनदेखी कर प्रशासनिक फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला न केवल गंभीर है, बल्कि शासन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।

“एक दिन के ट्रांसपोर्ट कमिश्नर” का आरोप

अजय साह ने दावा किया कि झारखंड के परिवहन सचिव Rajiv Ranjan ने नियमों को दरकिनार करते हुए खुद को “एक दिन का परिवहन आयुक्त” बना लिया।

उनके अनुसार, 10 मार्च को जारी कार्यालय आदेश संख्या 24 के जरिए परिवहन आयुक्त के सभी अधिकार अपने पास ले लिए गए। इसके बाद 11 मार्च को आदेश संख्या 25 जारी कर उसी आदेश को निरस्त भी कर दिया गया।

भाजपा का आरोप है कि इस तरह राजीव रंजन ने 24 घंटे के लिए खुद को परिवहन आयुक्त के रूप में स्थापित किया।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के उल्लंघन का आरोप

अजय साह ने कहा कि Supreme Court of India के निर्देशों के तहत 1 और 16 दिसंबर 2016 को झारखंड सरकार ने गजट अधिसूचना जारी कर दो समितियों—राज्य सड़क सुरक्षा परिषद और कोष प्रबंधन समिति—का गठन किया था।

इन समितियों में परिवहन आयुक्त को सदस्य सचिव बनाया गया है, जिसकी भूमिका प्रशासनिक और नीतिगत रूप से अहम होती है। भाजपा का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में इन नियमों और अधिसूचनाओं की अनदेखी की गई।

फैसलों की जांच की मांग

भाजपा ने इस मामले को गंभीर प्रशासनिक अनियमितता बताते हुए मांग की है कि उन 24 घंटों के दौरान परिवहन विभाग में लिए गए सभी निर्णयों की निष्पक्ष जांच हो।

अजय साह ने कहा कि इस अवधि में पास की गई फाइलों, स्वीकृत और अस्वीकृत प्रस्तावों की विस्तृत समीक्षा जरूरी है, ताकि किसी प्रकार की अनियमितता या लाभ पहुंचाने की कोशिश सामने आ सके।

पारदर्शिता पर उठे सवाल

भाजपा प्रवक्ता ने यह भी सवाल उठाया कि इतने महत्वपूर्ण आदेश की जानकारी मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को क्यों नहीं दी गई, जबकि वे संबंधित समितियों के अध्यक्ष हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे मामले में पारदर्शिता का अभाव दिखता है और इसे संभवतः जानबूझकर गोपनीय रखा गया।

“24 घंटे के खेल” पर जवाबदेही की मांग

अजय साह ने कहा कि इस पूरे “24 घंटे के खेल” के पीछे क्या मंशा थी, यह जनता के सामने आना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जवाबदेही तय करना आवश्यक है ताकि शासन व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।

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