मुख्य बिंदु:
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जनजातीय हितों को ध्यान में रखते हुए कई प्रस्तावों को दी गई स्वीकृति
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आदिवासी बहुल क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शराब बिक्री नियमों में संशोधन
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ईचा डैम के विस्थापितों पर रिपोर्ट तैयार कर आगे की कार्रवाई का निर्णय
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‘अबुआ बीर दिशोम’ अभियान को सतत चलाने और हर दो माह में वनपट्टा वितरण का निर्देश
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छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम की धारा 46 पर स्पष्टता लाने हेतु आयोग गठन पर सहमति
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लगुबुरु धर्मस्थल पर पनबिजली परियोजना स्थगित रखने का पुनः आश्वासन
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई TAC की बैठक
रांची स्थित झारखंड मंत्रालय के सभागार में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में झारखंड जनजातीय परामर्शदातृ परिषद (TAC) की बैठक संपन्न हुई। इस अहम बैठक में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग से जुड़े कई प्रस्तावों पर गहन चर्चा की गई और महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
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आदिवासी बहुल क्षेत्रों में पर्यटन और राजस्व के लिए मदिरा नियमों में संशोधन
बैठक में ‘झारखंड उत्पाद नियमावली 2025’ के तहत प्रस्तावित अधिसूचना के नियम 20 (iii) पर चर्चा हुई। इस नियम के अंतर्गत यह तय किया गया कि ऐसे आदिवासी बाहुल्य ग्राम पंचायत, जहां 50% या अधिक जनजातीय आबादी हो और जो पर्यटन दृष्टिकोण से महत्व रखते हों, वहां ऑफ प्रकरण के खुदरा मदिरा दुकानों की अनुमति दी जा सकेगी। इसका उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देना, राजस्व बढ़ाना और अवैध शराब बिक्री पर नियंत्रण करना है।
इसी क्रम में होटल, रेस्तरां, बार एवं क्लब अनुज्ञापन नियमावली 2025 पर भी सहमति बनी। तय किया गया कि पर्यटन स्थलों पर स्थित आदिवासी क्षेत्रों में होटल, रेस्तरां और बार को उत्पाद अनुज्ञप्ति दी जा सकती है।
ईचा डैम परियोजना से प्रभावित परिवारों की जांच रिपोर्ट तैयार करने पर सहमति
पश्चिमी सिंहभूम जिले में खरकई नदी पर प्रस्तावित ईचा बांध परियोजना पर पुनः विचार किया गया। TAC ने यह निर्देश दिया कि विस्थापित परिवारों की वर्तमान स्थिति का भौतिक सत्यापन कर एक फोटो व वीडियो युक्त रिपोर्ट तैयार की जाए, जिसे पीपीटी के रूप में प्रस्तुत किया जाए। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
“अबुआ बीर दिशोम” अभियान रहेगा सतत जारी
वन अधिकार अधिनियम के तहत चलाए जा रहे “अबुआ बीर दिशोम” अभियान पर चर्चा करते हुए यह तय किया गया कि अभियान निरंतर और व्यापक रूप से जारी रहेगा। हर दो महीने में वनपट्टा वितरण अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही, लंबित आवेदनों की स्थिति की समीक्षा कर तत्काल स्वीकृति प्रक्रिया को पूर्ण किया जाएगा।
छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम की धारा 46 पर आयोग गठन का निर्णय
छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1938 की धारा 46 के तहत थाना क्षेत्र की परिभाषा को लेकर असमंजस दूर करने हेतु बैठक में विस्तृत चर्चा हुई। निर्णय लिया गया कि राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग एक प्रस्ताव तैयार करे और इसके लिए एक अलग आयोग का गठन किया जाए, जो छह महीने में अपनी रिपोर्ट परिषद को सौंपेगा।
धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर भी हुआ मंथन
बोकारो जिले के ललपनिया स्थित लगुबुरु धर्मस्थल पर डीवीसी द्वारा प्रस्तावित पनबिजली परियोजना पर भी चर्चा की गई। सरकार ने पुनः आश्वस्त किया कि इस धार्मिक स्थल की संरक्षा सर्वोपरि है, और परियोजना को पहले ही स्थगित किया जा चुका है।
वनपट्टा धारक बच्चों के प्रमाण पत्रों की बाधाएं होंगी दूर
बैठक में यह मुद्दा भी उठा कि वनपट्टा धारक परिवारों के बच्चों को आवासीय और जाति प्रमाण पत्र जारी करने में कठिनाइयां हो रही हैं। परिषद ने इसके समाधान की दिशा में तत्काल कदम उठाने पर जोर दिया।
बैठक में शामिल हुए ये प्रमुख सदस्य
बैठक में कल्याण मंत्री एवं टीएसी उपाध्यक्ष चमरा लिंडा, विधायक प्रो. स्टीफन मरांडी, लुईस मरांडी, सोनाराम सिंकू, दशरथ गागराई, राजेश कच्छप, नमन विक्सल कोनगाड़ी, जिगा सुसारन होरो, संजीव सरदार, आलोक कुमार सोरेन, सुदीप गुड़िया, जगत मांझी, राम सूर्या मुण्डा, रामचन्द्र सिंह तथा नामित सदस्य नारायण उराँव एवं जोसाई मार्डी उपस्थित रहे।
इस बैठक में लिए गए निर्णय न केवल आदिवासी समुदाय के सर्वांगीण विकास की दिशा में सकारात्मक कदम हैं, बल्कि राज्य सरकार की जनजातीय हितों के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाते हैं। आने वाले समय में इन प्रस्तावों के प्रभावी क्रियान्वयन से झारखंड में समावेशी विकास को नई दिशा मिलेगी।
