अनुदान प्रपत्र में श्रेणी A, B, C हटने से जनजातीय क्षेत्रों के स्कूल–कॉलेजों पर संकट
वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए जारी अनुदान प्रपत्र में श्रेणी A, B और C को शामिल नहीं किए जाने पर गंभीर आपत्ति जताई गई है। वित्त रहित शिक्षा संघर्ष मोर्चा नेताओं का कहना है कि यदि इन श्रेणियों को बहाल नहीं किया गया, तो जनजातीय उप-योजना क्षेत्र में स्थित स्कूल और इंटर कॉलेज 2015 की अनुदान नियमावली के तहत तय स्लैब का लाभ नहीं ले पाएंगे। विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों में संचालित बालिका विद्यालय और बालिका इंटर कॉलेजों का अनुदान पहले की तुलना में काफी कम हो जाएगा, जो नियमावली 2015 का सीधा उल्लंघन है।
ऑनलाइन तिथि नहीं बढ़ी तो सैकड़ों संस्थान होंगे वंचित
अनुदान प्रपत्र ऑनलाइन भरने की अंतिम तिथि 5 जनवरी 2026 निर्धारित की गई है। मोर्चा नेताओं का कहना है कि यदि विभाग द्वारा यह तिथि नहीं बढ़ाई गई, तो सैकड़ों स्कूल और इंटर कॉलेज अनुदान प्रपत्र भरने से वंचित रह जाएंगे। उल्लेखनीय है कि वित्तीय वर्ष 2023–24 और 2025–26 में विभागीय पोर्टल तैयार न होने के कारण अनुदान प्रपत्र ऑफलाइन भरे गए थे, जबकि इस वर्ष नए पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन प्रक्रिया लागू की गई है।
यू-डाइस कोड और ई-विद्या वाहिनी पासवर्ड बनी बड़ी बाधा
नए अनुदान पोर्टल में यू-डाइस कोड और ई-विद्या वाहिनी का पासवर्ड अनिवार्य कर दिया गया है। लेकिन कई स्कूलों और कॉलेजों के पासवर्ड जिला शिक्षा पदाधिकारी या अन्य माध्यमों से बदले जा चुके हैं। कई संस्थानों के प्राचार्य भी बीच में पासवर्ड बदल चुके हैं। ऐसे में विभागीय पोर्टल में दर्ज पुराने विवरण से मेल न खाने के कारण पोर्टल खुल ही नहीं रहा है, जिससे आवेदन प्रक्रिया में भारी कठिनाई आ रही है।
सर्वर और तकनीकी खामियों से बढ़ी परेशानी
अनुदान पोर्टल में प्रयोगिक विवरण भरने के लिए जो साइट दी गई है, वह बेहद छोटी है और लोड नहीं ले पा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की अनियमितता, नेटवर्क समस्या और सर्वर गड़बड़ी के कारण पोर्टल बार-बार ठप हो जा रहा है। इस संबंध में 50 से अधिक स्कूल और इंटर कॉलेज पहले ही निदेशक माध्यमिक शिक्षा को लिखित आवेदन दे चुके हैं।
जनजातीय क्षेत्रों को मिलने वाला विशेष लाभ खत्म
मोर्चा नेताओं ने आरोप लगाया कि विभागीय पोर्टल से वह कॉलम हटा दिया गया है, जिससे जनजातीय और अनुसूचित जनजातीय क्षेत्रों के स्कूल–कॉलेजों को विशेष लाभ मिलता था। नियमावली 2015 में सामान्य क्षेत्र, ग्रामीण क्षेत्र और जनजातीय/बालिका विद्यालयों के लिए अलग-अलग स्लैब तय हैं, जिन्हें श्रेणी A, B और C के माध्यम से भरा जाता था। अब इन श्रेणियों के हटने से गुमला, लोहरदगा, सिमडेगा, खूंटी, चतरा, संथाल परगना, पश्चिमी सिंहभूम के आसानबनी, मुसाबनी, सरायकेला-खरसावां, मांडर, तमाड़ और बुंडू जैसे क्षेत्रों के स्कूल–कॉलेज स्लैब लाभ से वंचित हो जाएंगे।
अनुदान तिथि बढ़ाने की मांग, ज्ञापन सौंपेगा मोर्चा
मोर्चा नेताओं फजलुल कदीर अहमद, अरविंद सिंह, हरिहर प्रसाद कुशवाहा, मनोज तिर्की और विनय उरांव ने कहा कि श्रेणी A, B, C के बिना जनजातीय उप-योजना क्षेत्र के संस्थानों को अनुदान नहीं मिल पाएगा। वहीं अरविंद सिंह, चंदेश्वर पाठक, मनीष कुमार, गणेश महतो और नरोत्तम सिंह ने विभाग से यू-डाइस कोड और ई-विद्या वाहिनी पासवर्ड की शर्तों में शिथिलता देने की मांग की है।
मोर्चा के रघुनाथ सिंह, संजय कुमार, देवनाथ सिंह और मुरारी प्रसाद सिंह ने चेतावनी दी है कि यदि स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने अनुदान प्रपत्र भरने की तिथि 15 जनवरी 2026 तक नहीं बढ़ाई, तो सैकड़ों स्कूल और कॉलेज अनुदान से वंचित हो जाएंगे। इस मांग को लेकर मोर्चा 29 दिसंबर 2025 को शिक्षा सचिव और निदेशक माध्यमिक शिक्षा को ज्ञापन सौंपेगा।
