मुख्य बिंदु:
-
बाबूलाल मरांडी ने सचिव स्तर के अधिकारियों पर रायपुर मॉडल को जल्दबाज़ी में अपनाने का लगाया आरोप
-
चौबीस घंटे में छुट्टी के दिन दी गई रिपोर्ट को बताया गया ‘प्रायोजित अनुशंसा’
-
रायपुर यात्रा करने वाली टीम के हर सदस्य की जांच की मांग
-
“किसके दबाव में की गई सिफारिश?” – मरांडी ने उठाए सवाल
-
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से CBI जांच की सिफारिश की अपील
रायपुर मॉडल पर एक बार फिर भाजपा का वार
झारखंड में शराब नीति को लेकर एक बार फिर सियासी पारा चढ़ गया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने झारखंड में हुए शराब घोटाले को लेकर सीधे तौर पर राज्य सरकार और अफसरशाही पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि शराब घोटाले के पीछे छत्तीसगढ़ सिंडिकेट के साथ मिलीभगत थी, और इस पूरी साजिश की शुरुआत रायपुर से हुई थी।
चौबीस घंटे में बनी ‘प्रायोजित’ रिपोर्ट?
मरांडी का दावा है कि जब यह योजना बनाई जा रही थी, तब सचिव स्तर के एक वरिष्ठ अधिकारी के नेतृत्व में अफसरों की एक टीम को रायपुर भेजा गया था। हैरानी की बात यह रही कि महज चौबीस घंटे के भीतर ही, वह भी एक छुट्टी के दिन, पूरी टीम ने “छत्तीसगढ़ मॉडल” को अपनाने की अनुशंसा वाली रिपोर्ट सौंप दी।
उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को “प्रायोजित और पूर्वनियोजित” करार देते हुए कहा कि इसपर मीडिया और समाज में पहले भी तीखी आलोचना हो चुकी है।
इसे भी पढ़ें-
“रायपुर दौरे की हर कड़ी की जांच होनी चाहिए”
भाजपा नेता ने मांग की कि इस मामले में ACB (एंटी करप्शन ब्यूरो) अगर सचमुच गंभीर है, तो उसे रायपुर भेजी गई कमेटी के हर सदस्य की भूमिका और संपर्कों की जांच करनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि –
-
टीम ने रायपुर में किन लोगों से मुलाकात की?
-
क्या कोई डील हुई?
-
डील कराने में कौन-कौन लोग शामिल थे?
-
रिपोर्ट सौंपने में किसका दबाव था?
इन बिंदुओं पर जांच की मांग करते हुए मरांडी ने इसे “सिस्टमेटिक करप्शन” का मामला बताया।
हेमंत सोरेन से फिर की CBI जांच की मांग
अपने बयान के अंत में बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से स्पष्ट अपील की कि यदि वे वास्तव में झारखंड के लोगों को सच्चाई दिखाना चाहते हैं, तो उन्हें इस मामले की CBI जांच की सिफारिश करनी चाहिए।
उन्होंने कहा,
“मुख्यमंत्री जी, मैं एक बार फिर आपसे आग्रह करता हूं कि इस घोटाले की सच्चाई सामने लाने के लिए आप CBI जांच की अनुशंसा करें। जनता अब जवाब चाहती है।”
राजनीतिक बयानबाज़ी या भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल?
बाबूलाल मरांडी के इस ताजा बयान ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। जहां एक ओर भाजपा इसे ‘भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई’ बता रही है, वहीं सत्ता पक्ष इसे ‘राजनीतिक आरोप’ कहकर खारिज करता रहा है।
अब देखना होगा कि क्या मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस पूरे मामले में CBI जांच की अनुशंसा करते हैं या फिर इसे महज एक ‘राजनीतिक शोर’ मानकर नजरअंदाज किया जाता है।
