JPSC-JSSC परीक्षा रद्द, छात्रों ने कोर्ट में सबूत पेश करने की मांग

परीक्षा रद्द करने का फैसला, लेकिन Cancellation Memo पर क्यों चुप्पी- बाबूलाल

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JPSC-JSSC परीक्षा विवाद: जांच पर सवाल, Cancellation Memo को लेकर छात्रों ने सरकार से मांगा जवाब

रांची।  झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि, राज्य में JPSC और JSSC की परीक्षाओं को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। छात्रों की ओर से परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी और नौकरी बेचे जाने के आरोपों की जांच को लेकर CID की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। छात्रों का कहना है कि जांच में अब तक उन सभी बिंदुओं पर कार्रवाई होती नहीं दिख रही है, जिनसे परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

प्रमुख बातें

  • JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की जांच पर छात्रों ने उठाए सवाल
  • JPSC सदस्य अजिता भट्टाचार्य को लेकर लगाए गए आरोपों की जांच की मांग
  • JSSC-CGL एडमिट कार्ड मामले में पूछताछ को लेकर सवाल
  • परीक्षा रद्द करने के सरकारी निर्णय के बाद Cancellation Memo पर नजर
  • छात्रों की मांग—ठोस आधार और साक्ष्य के साथ कोर्ट में दाखिल हो Cancellation Memo

जांच को लेकर छात्रों में असंतोष

छात्रों का आरोप है कि PSC-JSSC परीक्षाओं में कथित तौर पर पैसे के लेनदेन और अनियमितता से जुड़े कई मामले सामने आने के बावजूद CID की जांच अब तक संतोषजनक नहीं कही जा सकती। छात्रों की ओर से JPSC की सदस्य अजिता भट्टाचार्य को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उनका दावा है कि पैसे लेकर इंटरव्यू में अंक बढ़ाने से संबंधित प्रमाण सामने आए हैं।

हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकल सकता है।

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ऑडियो और एडमिट कार्ड मामले को लेकर भी सवाल

छात्रों की ओर से झामुमो गिरिडीह जिला अध्यक्ष से जुड़े कथित पैसों के लेनदेन के एक ऑडियो का भी उल्लेख किया गया है। इसके अलावा JSSC-CGL का एडमिट कार्ड जिस विनोद सिंह के ठिकाने से बरामद होने का दावा किया गया है, उससे अब तक पूछताछ नहीं किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

छात्रों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े ऐसे मामलों की जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाना जरूरी है।

CID की जांच और अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल

छात्रों ने यह भी सवाल उठाया है कि CID द्वारा पूरी परीक्षा प्रक्रिया को कथित तौर पर दूषित बताए जाने के बावजूद तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका को लेकर अब तक क्या कार्रवाई हुई है। विशेष रूप से अनुराग गुप्ता, सुधीर गुप्ता और प्रशांत कुमार की भूमिका को लेकर छात्रों ने गंभीर सवाल उठाए हैं।

छात्रों का आरोप है कि कुछ अधिकारियों को आयोग में बनाए रखने से जांच की निष्पक्षता और जवाबदेही को लेकर संदेह पैदा हो रहा है। इन आरोपों की वास्तविकता जांच के निष्कर्षों और आधिकारिक कार्रवाई से ही स्पष्ट होगी।

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अब Cancellation Memo पर टिकी नजर

सरकार द्वारा 17 तारीख को परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिए जाने के बाद छात्रों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल Cancellation Memo को लेकर है।

छात्रों का कहना है कि सरकार ने जब परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया है तो उसके पीछे मौजूद ठोस कारण, जांच के निष्कर्ष और संबंधित साक्ष्य न्यायालय के सामने भी मजबूती से रखे जाने चाहिए।

उनकी मांग है कि Cancellation Memo को बिना अनावश्यक देरी के न्यायालय में दाखिल किया जाए, ताकि परीक्षा रद्द करने के सरकारी निर्णय का कानूनी आधार स्पष्ट हो सके।

आंदोलन स्थगित, अब सरकार की जिम्मेदारी

छात्रों का कहना है कि राज्य सरकार के आश्वासन के बाद आंदोलन स्थगित किया गया है। अब उस आश्वासन को पूरा करना सरकार की जिम्मेदारी है।

छात्रों ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा रद्द करने का केवल निर्णय पर्याप्त नहीं है। सरकार को न्यायालय के समक्ष यह भी बताना होगा कि परीक्षा रद्द करने की आवश्यकता क्यों पड़ी और इसके समर्थन में कौन-कौन से ठोस तथ्य एवं साक्ष्य मौजूद हैं।

अब छात्रों की नजर सरकार की अगली कार्रवाई और न्यायालय में Cancellation Memo दाखिल किए जाने पर है। परीक्षा विवाद में आगे की दिशा इसी प्रक्रिया से काफी हद तक तय हो सकती है।

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