अनुदानित विद्यालयों के छात्रों को मिलेगी ड्रेस, किताब और छात्रवृत्ति जैसी सरकारी सुविधाएं, वित्त मंत्री ने दी मंजूरी
मुख्य बिंदु:
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अनुदानित इंटर कॉलेज, उच्च विद्यालय, संस्कृत और मदरसा विद्यालयों के छात्रों को अब सरकारी स्कूलों जैसी सुविधाएं
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वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने दी प्रस्ताव पर सहमति
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मोर्चा की वर्षों की मांग को मिली बड़ी सफलता
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साइकिल छोड़ बाकी सभी सुविधाएं मिलेंगी समान रूप से
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ग्रामीण, आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को होगा सीधा लाभ
झारखंड के अनुदानित एवं गैर-सरकारी विद्यालयों के छात्रों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। राज्य सरकार अब इन विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को भी सरकारी विद्यालयों की तरह ड्रेस, किताब, छात्रवृत्ति और अन्य शैक्षणिक सुविधाएं देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसमें अनुदानित इंटर कॉलेज, उच्च विद्यालय, संस्कृत विद्यालय और मदरसा शामिल हैं।
इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को लेकर लंबे समय से मोर्चा द्वारा लगातार आवाज उठाई जाती रही है। मोर्चा ने इसे लेकर शिक्षा विभाग से लेकर सरकार के शीर्ष स्तर तक पहल की थी। इसी प्रयास का परिणाम है कि पूर्व शिक्षा मंत्री बैजनाथ राम के कार्यकाल में इस प्रस्ताव को विभागीय स्तर पर अनुमोदन मिला।
इसके बाद विभाग ने प्रस्ताव को वित्त विभाग को भेजा था, जो कुछ समय से लंबित पड़ा था। अब एक महत्वपूर्ण प्रगति के तहत राज्य के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने इस प्रस्ताव पर अपनी औपचारिक सहमति दे दी है और इसे स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को वापस भेज दिया है, ताकि आगामी प्रक्रिया पूरी की जा सके।
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सूत्रों के अनुसार, विभाग अब इसे अगली मंत्रिपरिषद की बैठक में कैबिनेट के समक्ष मंजूरी के लिए भेजने की तैयारी में है। इससे पहले इसे सभी संबंधित विभागों की सहमति से पूर्ण कर लिया जाएगा।
मोर्चा के नेताओं ने इस फैसले का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन और वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर का आभार प्रकट किया है। मोर्चा नेताओं में कुंदन कुमार सिंह, रघुनाथ सिंह, हरिहर प्रसाद कुशवाहा, फजलुल कदीर अहमद, अरविंद सिंह, गणेश महतो, देवनाथ सिंह, नरोत्तम सिंह, मनोज तिर्की, रेशमा बेक, पशुपति महतो, बिरसो उरांव, संजय कुमार, रघु विश्वकर्मा, चंदेश्वर पाठक, मनोज कुमार और रंजीत मिश्रा प्रमुख रूप से शामिल हैं।
इन नेताओं ने कहा कि इस फैसले से झारखंड के ग्रामीण, आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्र-छात्राओं को बहुत बड़ा लाभ मिलेगा। अब वे केवल आर्थिक तंगी के कारण शिक्षा से वंचित नहीं रहेंगे। ड्रेस, किताब और छात्रवृत्ति मिलने से उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। विशेष रूप से संस्कृत विद्यालयों और मदरसों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की स्थिति भी इससे सशक्त होगी।
हालांकि, साइकिल योजना फिलहाल केवल सरकारी विद्यालयों तक सीमित रहेगी, लेकिन बाकी सभी सुविधाएं इन अनुदानित विद्यालयों तक विस्तार पा जाएंगी। यह निर्णय न केवल सामाजिक समानता की दिशा में एक कदम है, बल्कि शिक्षा के अधिकार को व्यावहारिक रूप से प्रभावी बनाने वाला कदम भी है।
