रिम्स निदेशक प्रकरण पर कांग्रेस का पलटवार
मुख्य बिंदु-
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झारखंड कांग्रेस महासचिव आलोक कुमार दूबे ने रिम्स के पूर्व निदेशक द्वारा कोर्ट जाने के फैसले की आलोचना की।
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उन्होंने इसे “गलत होकर भी कोर्ट जाना” और “राजनीतिक रंग देने की कोशिश” बताया।
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कहा गया कि नियुक्ति और हटाने दोनों सरकार द्वारा तय प्रक्रियाओं के अनुसार हुए हैं।
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मरीजों, डॉक्टरों और स्टाफ ने पूर्व निदेशक के व्यवहार को लेकर लगातार शिकायतें की थीं।
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पूर्व निदेशक पर स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार सिंह से अभद्र व्यवहार करने का भी आरोप।
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सरकार ने सभी पक्षों से इनपुट लेने के बाद यह निर्णय लिया, कोई पक्षपात नहीं किया गया।
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कांग्रेस नेता ने कहा – पूर्व निदेशक आत्मचिंतन करें, संस्था की गरिमा को ठेस न पहुंचाएं।
आलोक कुमार दूबे बोले – “गलत होकर कोर्ट जाना दुर्भाग्यपूर्ण, पूर्व निदेशक करें आत्मचिंतन”
रांची, 22 अप्रैल: झारखंड कांग्रेस के प्रदेश महासचिव आलोक कुमार दूबे ने रिम्स के पूर्व निदेशक द्वारा अपनी बर्खास्तगी को अदालत में चुनौती देने के फैसले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण और राजनीतिक रंग देने की कोशिश करार दिया।
“नियमों के अनुसार हुआ नियुक्ति और हटाने का निर्णय”
आलोक दूबे ने स्पष्ट किया कि पूर्व निदेशक की नियुक्ति जिस प्रक्रिया से की गई थी, उसी प्रक्रिया के तहत सरकार ने उन्हें हटाया है। उन्होंने कहा, “रिम्स जैसे उच्च संस्थान में जनता की सेवा सर्वोपरि है। यदि कोई व्यक्ति इस कसौटी पर खरा नहीं उतरता, तो उसे पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं।”
“मरीजों और स्टाफ ने किया व्यवहार को लेकर कई बार विरोध”
आलोक दूबे ने बताया कि वे कई बार निजी इलाज और परिचितों को दिखाने रिम्स गए हैं और हर बार वहां के मरीजों, चिकित्सकों और स्टाफ से पूर्व निदेशक के व्यवहार को लेकर शिकायतें सुनी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनका रवैया असहयोगात्मक और अपमानजनक था, जो कि एक जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति के लिए अस्वीकार्य है।
स्वास्थ्य सचिव से अभद्रता को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
उन्होंने आगे कहा कि एक विभागीय बैठक के दौरान पूर्व निदेशक ने स्वास्थ्य विभाग के सचिव अजय कुमार सिंह के साथ भी असम्मानजनक व्यवहार किया था। “श्री सिंह एक कर्तव्यनिष्ठ, सौम्य और बेदाग छवि वाले वरिष्ठ अधिकारी हैं। उनके साथ ऐसा व्यवहार पूरे स्वास्थ्य विभाग की गरिमा को ठेस पहुंचाने जैसा है।”
“सरकार के निर्णय में कोई पक्षपात नहीं”
आलोक दूबे ने कहा कि सरकार ने रिम्स से जुड़ी समस्याओं और शिकायतों का विस्तृत अध्ययन कर, सभी संबंधित पक्षों से बात करने के बाद यह निर्णय लिया है। उन्होंने कहा, “इस फैसले को चुनौती देकर और मीडिया में राजनीतिक बयानबाजी करके पूर्व निदेशक केवल ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।”
“संस्था और राज्य की प्रतिष्ठा को नुकसान न पहुंचाएं”
कांग्रेस नेता ने पूर्व निदेशक को सलाह दी कि वे आत्मचिंतन करें और संस्था की छवि को आघात पहुंचाने से बचें। “इस प्रकार के विवादों से रिम्स जैसी संस्थाओं की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगता है, जो कि राज्यहित में नहीं है।”
