घाटशिला उपचुनाव में बुलाई गई ‘परिवर्तन की पुकार’, भाजपा और जेएमएम समर्थकों में सोशल मीडिया पर जंग तेज़
मुख्य बिंदु:
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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने बाबूलाल सोरेन को दी बधाई
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झामुमो उम्मीदवार सोमेश चंद्र सोरेन के समर्थन में विक्टर सोरेन का भावनात्मक पोस्ट
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घाटशिला उपचुनाव सोशल मीडिया पर गरमाया, दोनों दलों में माहौल चुनावी
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रांची | घाटशिला विधानसभा उपचुनाव को लेकर सोशल मीडिया पर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। भाजपा और झामुमो दोनों खेमों के नेता अपने-अपने उम्मीदवारों के समर्थन में लगातार पोस्ट कर रहे हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पार्टी उम्मीदवार बाबूलाल सोरेन को उपचुनाव के लिए अधिकृत प्रत्याशी बनाए जाने पर शुभकामनाएं दी हैं।
मरांडी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा— “घाटशिला विधानसभा उपचुनाव में श्री बाबूलाल सोरेन जी को भारतीय जनता पार्टी का उम्मीदवार घोषित किए जाने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। घाटशिला की देवतुल्य जनता हेमंत सरकार के भ्रष्टाचार और अराजकता का करारा जवाब देगी तथा एनडीए गठबंधन को विजय का आशीर्वाद प्रदान करेगी। घाटशिला है तैयार, परिवर्तन को इस बार!”
मरांडी के इस बयान को भाजपा कार्यकर्ता बड़े स्तर पर शेयर कर रहे हैं। पार्टी इसे ‘परिवर्तन की पुकार’ बताते हुए जनसमर्थन जुटाने में सक्रिय है।
स्वर्गीय रामदास सोरेन के अधूरे सपनों का उल्लेख
वहीं दूसरी ओर झामुमो समर्थकों में भी उत्साह चरम पर है। स्वर्गीय रामदास सोरेन के भतीजे विक्टर सोरेन ने सोशल मीडिया पर एक भावनात्मक पोस्ट साझा किया है। उन्होंने झामुमो उम्मीदवार सोमेश चंद्र सोरेन के लिए समर्थन जताते हुए लिखा— “घाटशिला विधानसभा के उपचुनाव में झामुमो के युवा और समर्पित उम्मीदवार सोमेश चंद्र सोरेन जी को शानदार जीत के लिए अग्रिम शुभकामनाएं! यह जीत सिर्फ एक चुनाव की नहीं, बल्कि स्वर्गीय रामदास जी के अधूरे सपनों को पूरा करने की दिशा में एक सशक्त कदम होगा।”
विक्टर सोरेन के इस पोस्ट को झामुमो समर्थकों ने भावनात्मक अपील के रूप में देखा है। कई कार्यकर्ताओं ने इसे “रामदास सोरेन की विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प” बताते हुए साझा किया है।
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सोशल मीडिया पर गरम हुआ चुनावी माहौल
दोनों दलों के नेताओं और समर्थकों के बीच सोशल मीडिया पर बयानबाज़ी और प्रचार अभियान तेज़ हो गया है। भाजपा जहाँ भ्रष्टाचार और सुशासन के मुद्दे पर मतदाताओं को साधने की कोशिश कर रही है, वहीं झामुमो दिवंगत नेता की विरासत और स्थानीय विकास की योजनाओं को केंद्र में रखकर प्रचार कर रही है।
घाटशिला उपचुनाव अब सिर्फ एक राजनीतिक मुकाबला नहीं, बल्कि भावनात्मक और विचारधारात्मक संघर्ष बन गया है — जहां एक ओर ‘परिवर्तन की पुकार’ है, तो दूसरी ओर ‘सपनों को पूरा करने का संकल्प’।
