रांची में आयोजित “हर घर स्वदेशी” मैराथन में राज्यपाल बोले – स्वदेशी अपनाना देशभक्ति का प्रतीक.

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“हर घर स्वदेशी” से विकसित भारत की दिशा में कदम – राज्यपाल संतोष गंगवार ने रांची में दी आत्मनिर्भरता की प्रेरणा

मुख्य बिंदु:

मोरहाबादी, रांची में “हर घर स्वदेशी – विकसित भारत @2047” मैराथन का आयोजन

राज्यपाल ने कहा – स्वदेशी अपनाना देशभक्ति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक

प्रधानमंत्री मोदी के “वोकल फॉर लोकल” संदेश को जीवन में अपनाने का आह्वान

केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ को आयोजन के लिए बधाई

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रांची के मोरहाबादी में दौड़ी स्वदेशी की भावना

रांची के मोरहाबादी मैदान में रविवार को “हर घर स्वदेशी, घर घर स्वदेशी – विकसित भारत @2047” मैराथन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर झारखंड के माननीय राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों, आयोजकों और नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा कि यह आयोजन राष्ट्र चेतना, आत्मनिर्भरता और स्वदेशी भावना का जीवंत प्रतीक है।
राज्यपाल ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम देश में स्वदेशी सोच को मजबूत बनाते हैं और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

राज्यपाल ने दिया ‘स्वदेशी अपनाने’ का संदेश

अपने संबोधन में राज्यपाल श्री गंगवार ने कहा,

> “हर घर स्वदेशी का यह आह्वान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के उस विचार को आत्मसात करने का संदेश देता है, जिसमें उन्होंने कहा था कि स्वदेशी अपनाना केवल वस्तु का चयन नहीं, बल्कि देश के प्रति समर्पण का प्रतीक है।”

 

उन्होंने कहा कि स्वदेशी अपनाने से न केवल स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलता है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होती है। यही भावना “विकसित भारत @2047” की दिशा में हमारे कदमों को आगे बढ़ाती है।

‘वोकल फॉर लोकल’ ही है सच्ची देशभक्ति: राज्यपाल

राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी लगातार देशवासियों से “वोकल फॉर लोकल” बनने का आह्वान करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब हम अपने देश में निर्मित वस्तुओं को प्राथमिकता देते हैं, तो हम केवल किसी उत्पाद का समर्थन नहीं करते, बल्कि अपने देश के श्रम, कौशल और सम्मान का सम्मान करते हैं।
उन्होंने कहा कि यह समय है जब हर भारतीय को “वोकल फॉर लोकल” संदेश को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाना चाहिए।

‘स्वदेशी अपनाना, देश की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है’

राज्यपाल गंगवार ने कहा कि स्वदेशी वस्तुओं के प्रयोग से स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

> “स्वदेशी अपनाना, देश की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है, और यही विकसित भारत 2047 का मार्ग है,”
राज्यपाल ने कहा।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि झारखंड जैसे राज्य, जहां प्राकृतिक संसाधनों और हस्तशिल्प की समृद्ध परंपरा है, स्वदेशी आंदोलन के अग्रदूत बन सकते हैं।

 

केंद्रीय मंत्री संजय सेठ को दी बधाई

राज्यपाल ने इस अभियान के आयोजन के लिए केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस तरह के जन-जागरूकता अभियानों से नागरिकों में राष्ट्रीय भावना और आत्मनिर्भरता के प्रति विश्वास बढ़ता है।
उन्होंने सभी प्रतिभागियों और आयोजकों को शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह मैराथन केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय संकल्प का प्रतीक है, जहां हर कदम स्वदेशी, स्वास्थ्य और स्वाभिमान की ओर बढ़ रहा है।

जन-आंदोलन बने ‘हर घर स्वदेशी’

राज्यपाल ने कहा कि “हर घर स्वदेशी” को जन-आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे अपने दैनिक जीवन में स्वदेशी उत्पादों का प्रयोग करें, स्थानीय उद्योगों और कारीगरों का समर्थन करें और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।
उन्होंने कहा कि जब प्रत्येक नागरिक स्वदेशी वस्तुओं को प्राथमिकता देगा, तभी भारत ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य को प्राप्त कर सकेगा।

‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की ओर कदम

राज्यपाल ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि भारत अपने विकास के 100 वर्षों के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। इस यात्रा में “स्वदेशी” भावना ही हमारी असली ताकत है। उन्होंने कहा,

> “हमें आत्मनिर्भरता की राह पर चलते हुए विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान देना चाहिए। यही महात्मा गांधी, डॉ. अंबेडकर और हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों का भारत है।”

 

जनभागीदारी से ही बनेगा आत्मनिर्भर भारत

राज्यपाल ने नागरिकों से अपील की कि वे स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग केवल एक विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि देशभक्ति के कर्तव्य के रूप में करें। उन्होंने कहा कि जब हर नागरिक ‘वोकल फॉर लोकल’ बनेगा, तभी भारत सच्चे अर्थों में आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनेगा।

“हर घर स्वदेशी” मैराथन न केवल फिटनेस का प्रतीक है, बल्कि यह उस विचारधारा को मजबूत करता है जो भारत को आत्मनिर्भर और विकसित बनाने की दिशा में प्रेरित करती है।
राज्यपाल के संदेश ने यह स्पष्ट कर दिया कि आत्मनिर्भरता का मार्ग स्वदेशी उत्पादों, स्थानीय उद्योगों और जनसहभागिता से होकर ही गुजरता है।

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