झारखंड सरकार की सख्ती: योजनाओं में लापरवाही पर कार्रवाई तय।

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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का निर्देश: 2025-26 में हर विभाग बनाए 3 असरदार योजनाएं, तय समय में हो क्रियान्वयन

मुख्य बिंदु:

  1. हर विभाग को वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 3 योजनाएं तय करने का निर्देश

  2. योजनाओं को 1 से 1.5 साल के भीतर जनता को समर्पित करना होगा

  3. मुख्यमंत्री ने कहा, लापरवाही बर्दाश्त नहीं, योजनाएं हों पारदर्शी और प्रभावी

  4. जरूरी प्रमाण पत्रों के लिए आम जनता को न हो परेशानी

  5. विभागों को संसाधन जुटाने और समयबद्धता पर देना होगा जोर



राज्य सरकार की योजनाएं अब समयबद्ध और जनोपयोगी होंगी

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड के सभी विभागों को निर्देश दिया है कि वे वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कम से कम तीन ऐसी योजनाएं चिह्नित करें, जिन्हें एक से डेढ़ साल की समयावधि में धरातल पर उतारा जा सके और राज्य की जनता को समर्पित किया जा सके। यह निर्देश उन्होंने झारखंड मंत्रालय में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिवों को दिए।

योजनाएं तय समय में पूरी हों, न हो कोई लापरवाही

मुख्यमंत्री ने बैठक में स्पष्ट कहा कि जो योजनाएं बनाई जाएंगी, वे पूरी पारदर्शिता के साथ लागू होनी चाहिए और जनता को उनका सीधा लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही या कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही उन्होंने सभी जरूरी संसाधनों की व्यवस्था समय रहते सुनिश्चित करने का निर्देश भी अधिकारियों को दिया।

“सरकार की योजनाएं कागजों में नहीं, जमीन पर दिखनी चाहिए,” – हेमंत सोरेन

जनता की सुविधा का हो पूरा ध्यान, प्रमाण पत्र बनवाने में न हो देरी

मुख्यमंत्री ने एक बड़ी चिंता का विषय उठाया – आम जनता को आय, जाति, आवासीय, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने में होने वाली परेशानियां। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाता है और इससे लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

“ऐसे दस्तावेज आम जनता की ज़रूरत हैं, इन्हें बनवाने में जरा भी देरी न हो, ऐसी व्यवस्था बनाएं,” – मुख्यमंत्री

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस प्रक्रिया को पूरी तरह से सरल, पारदर्शी और परेशानी-मुक्त बनाया जाए ताकि आम नागरिकों को चक्कर न काटना पड़े।

योजनाएं असरदार हों और समय से पहले पूरी करने का हो प्रयास

मुख्यमंत्री ने कहा कि हर योजना तभी सार्थक होती है जब उसका लाभ जरूरतमंदों तक समय पर पहुंचे। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि:

  • गर्मी से पहले पेयजल की व्यवस्था सुदृढ़ होनी चाहिए

  • मॉनसून से पूर्व जल प्रबंधन पर ध्यान दिया जाए

  • जाड़े से पहले कंबल वितरण पूरी हो

  • नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले शिक्षा सामग्री और साइकिल वितरण पूरा किया जाए

उन्होंने कहा कि इसी प्रकार की और भी कई ज़रूरी योजनाएं हैं, जिन्हें पहले ही पूरा करने का प्रयास किया जाना चाहिए।

विभागों को केवल खर्च ही नहीं, संसाधन भी जुटाने होंगे

मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि विभागों को केवल बजट खर्च करने की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि उन्हें संसाधनों की भी पहचान करनी होगी और उन्हें जुटाना होगा।

उन्होंने कहा कि कई फ्लैगशिप योजनाएं संचालित हो रही हैं और उनके सफल क्रियान्वयन के लिए ठोस रणनीति और समन्वय आवश्यक है।

“अगर हमारे पास संसाधन पर्याप्त होंगे, तभी हम योजनाओं का प्रभावी लाभ जनता तक पहुंचा पाएंगे,” – मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन

सरकार की प्राथमिकता: पारदर्शी, असरदार और भरोसेमंद योजनाएं

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जनता का विश्वास तभी जीता जा सकता है जब योजनाएं पारदर्शी और असरदायक हों। इसके लिए सकारात्मक सोच और मजबूत नीतियों की जरूरत है।

“जनता का विश्वास हमारी सबसे बड़ी पूंजी है, उसे बनाए रखने के लिए हमें ईमानदारी और तेजी से काम करना होगा।”

उच्चस्तरीय बैठक में सभी प्रमुख अधिकारी हुए शामिल

इस समीक्षा बैठक में राज्य की मुख्य सचिव श्रीमती अलका तिवारी, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार सहित सभी विभागों के प्रमुख अधिकारी शामिल थे। सभी से आग्रह किया गया कि वे नीतियों को जल्द अमल में लाएं और हर मोर्चे पर राज्य को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं।

निष्कर्ष: योजनाएं बनेंगी जमीन से जुड़ी, पारदर्शी और समयबद्ध

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का यह निर्देश झारखंड में योजनाओं के क्रियान्वयन के तौर-तरीकों को बदलने वाला साबित हो सकता है। इससे जहां सरकारी तंत्र की कार्यशैली में पारदर्शिता आएगी, वहीं जनता को समय पर योजनाओं का लाभ मिलेगा।

सरकार की मंशा स्पष्ट है – जनता के लिए काम, समय पर काम और असरदार काम।

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