आयुष्मान योजना में लापरवाही और सरना धर्म कोड पर दोहरापन: बाबूलाल मरांडी का झामुमो-कांग्रेस पर तीखा हमला
मुख्य बिंदु:
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बाबूलाल ने हेमंत सरकार पर आयुष्मान योजना के लाभ से जनता को वंचित रखने का आरोप लगाया
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750 सूचीबद्ध अस्पतालों में से 538 को फरवरी 2025 से भुगतान नहीं
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ग्रामीण क्षेत्रों में 30 बेड की शर्त गरीबों के खिलाफ
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सरना कोड से पहले “सरना संस्कृति” को बचाने की नसीहत
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2011 की जनगणना के आंकड़ों से ईसाई धर्मांतरण पर चिंता
प्रेस वार्ता में सरकार को कटघरे में खड़ा किया
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में दो बड़े मुद्दों – आयुष्मान भारत योजना की बदहाली और सरना धर्म कोड को लेकर झामुमो-कांग्रेस की राजनीति – पर सरकार को घेरा।

“आयुष्मान योजना झारखंड में दम तोड़ रही है”
मरांडी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा झारखंड से ही लॉन्च की गई आयुष्मान भारत योजना आज राज्य में बुरी तरह शिथिल हो चुकी है। योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज का प्रावधान है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार की भागीदारी क्रमशः 60:40 होती है। हालांकि, झारखंड सरकार इसे “मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना” के तहत चला रही है, लेकिन यह महज नाम भर रह गई है।
750 अस्पतालों में भुगतान अटका, गरीबों का इलाज ठप
उन्होंने कहा कि राज्य में सूचीबद्ध 750 अस्पतालों में से 538 को फरवरी 2025 से भुगतान नहीं हुआ है और 212 अस्पतालों को पिछले 10 महीनों से पैसे नहीं मिले हैं। इससे कई अस्पतालों ने सरकार को “त्राहिमाम” संदेश भेजते हुए योजना के तहत इलाज बंद कर दिया है, जिससे गरीब जनता इलाज के लिए दर-दर भटक रही है।
30 बेड का प्रावधान ग्रामीणों के खिलाफ
मरांडी ने सरकार की नीतियों को अव्यावहारिक बताते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 30 बेड वाले अस्पतालों की अनिवार्यता झारखंड के जनसांख्यिकीय ढांचे के खिलाफ है, जहां अधिकांश इलाके में ऐसे अस्पताल हैं ही नहीं। भारत सरकार की गाइडलाइन में 10 बेड के अस्पताल का भी प्रावधान है, जिसे राज्य सरकार नजरअंदाज कर रही है।
“स्वास्थ्य मंत्री ईडी को जिम्मेदार ठहराकर बच नहीं सकते”
स्वास्थ्य मंत्री द्वारा हालिया बयानों में ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) को व्यवस्था के लचर होने का कारण बताने पर बाबूलाल मरांडी ने तंज कसते हुए कहा कि “ईडी ने किसी अस्पताल पर छापा नहीं मारा। छापे दलालों और बिचौलियों के घर पर पड़े। अगर सरकारी फाइलें उनके घर में थीं, तो पहले एफआईआर दर्ज होनी चाहिए।”
“सरना कोड की राजनीति, संस्कृति की अनदेखी”
प्रेस वार्ता के दौरान बाबूलाल मरांडी ने सरना धर्म कोड की मांग पर भी सवाल उठाया। उन्होंने झामुमो और कांग्रेस पर दोहरेपन का आरोप लगाते हुए कहा कि “सरना धर्म कोड से पहले सरना संस्कृति, स्थल, मारांग बुरु, जाहेर थान की रक्षा जरूरी है।”
उन्होंने कहा कि अगर ईसाई धर्मांतरण की मौजूदा दर इसी तरह बढ़ती रही, तो “सरना धर्म कोड कौन भरेगा?”
2011 की जनगणना से धर्मांतरण का खुलासा
मरांडी ने 2011 की जनगणना का हवाला देते हुए बताया कि उस समय झारखंड की कुल जनसंख्या 3,29,88,134 थी, जिसमें आदिवासियों की संख्या 86,45,042 यानी 26.20% थी। इसमें से 14,18,608 (15.48%) लोग ईसाई धर्म को अपना चुके हैं।
विस्तार से उन्होंने बताया कि:
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उरांव: 26% ईसाई
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मुंडा (पातर मुंडा सहित): 33%
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संथाल: 0.85%
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हो: 2.14%
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खड़िया: 67.92% ईसाई
उन्होंने कहा कि ये आंकड़े लगभग 15 वर्ष पुराने हैं, और आज स्थिति और भयावह हो सकती है।
“धर्म स्वतंत्रता कानून को लागू करें”
मरांडी ने कहा कि भाजपा सरकार ने रघुवर दास के कार्यकाल में धर्मांतरण रोकने के लिए धर्म स्वतंत्रता कानून बनाया था, जिसे वर्तमान सरकार गंभीरता से लागू नहीं कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “राज्य सरकार आदिवासियों की संस्कृति, परंपरा, विश्वास को बचाने का प्रयास करे, वरना सरना कोड मात्र एक छलावा बनकर रह जाएगा।”
“जनता को धोखा देना बंद करे सरकार”
प्रेस वार्ता के अंत में बाबूलाल मरांडी ने साफ कहा कि राज्य सरकार को “इधर-उधर की बातें छोड़कर जनता के हित में फैसले लेने चाहिए”। अस्पतालों का बकाया जल्द चुकाया जाए, ग्रामीण क्षेत्रों में 10 बेड के अस्पताल भी सूचीबद्ध हों, और सरना संस्कृति को बचाने की पहल हो – यही जनता की अपेक्षा है।
