मुख्य बिंदु.
- हेमंत सोरेन ने 28 नवंबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
- मंत्रिमंडल विस्तार में देरी का कारण कांग्रेस और राजद का निर्णय न लेना।
- कांग्रेस विधायकों और नेताओं की हेमंत सोरेन से लगातार मुलाकातें।
- नए चेहरों में अनूप सिंह, शिल्पी नेहा तिर्की, हाफिजुर हसन और अन्य के नाम चर्चा में।
- राजद में सुरेश पासवान सबसे आगे, भाकपा माले ने सरकार में शामिल होने से मना किया।
झारखंड में मंत्रिमंडल विस्तार पर चर्चा
शपथ ग्रहण के बाद मंत्रिमंडल का इंतजार
- 28 नवंबर को शपथ ग्रहण: हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
- 1 दिसंबर तक मंत्रिमंडल विस्तार नहीं: कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) द्वारा अपने मंत्रियों के नाम तय न करने के कारण देरी।
- झामुमो में स्थिरता: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) में फैसले लेने की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर।
कांग्रेस नेताओं की सक्रियता
- दिल्ली से रांची तक दौड़: कांग्रेस के नेताओं और विधायक लगातार रांची और दिल्ली के बीच संपर्क बनाए हुए हैं।
- मंत्री पद की दावेदारी: कांग्रेस और झामुमो के विधायकों की मुख्यमंत्री से मुलाकातें तेज।
नए चेहरों के नाम
- प्रमुख दावेदार:
- कांग्रेस से अनूप सिंह, शिल्पी नेहा तिर्की, राजेश कच्छप, नमन विक्सल कोंगाड़ी और ममता देवी।
- झामुमो से अनंत प्रताप देव, हाफिजुल हसन, दीपक बिरुवा, रामदास सोरेन और मथुरा प्रसाद, लुईस मरांडी।
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राजद और भाकपा माले का रुख
- राजद में प्रतिस्पर्धा: चार विधायकों वाली पार्टी में सुरेश पासवान सबसे आगे, जबकि गोड्डा और हुसैनाबाद के विधायक भी दौड़ में।
- भाकपा माले: सरकार में शामिल होने से इनकार लेकिन समर्थन जारी रहेगा।
