हेमंत सोरेन का यूरोपीय दौरा: क्या स्वीडन और स्पेन झारखंड में निवेश के लिए तैयार हैं?
मुख्य बिंदु:
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झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 18 से 27 अप्रैल तक स्वीडन और स्पेन की यात्रा पर हैं।
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कुल 11 सदस्यों की उच्चस्तरीय टीम उनके साथ जा रही है।
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उद्देश्य है—स्वास्थ्य, तकनीक, ग्रीन एनर्जी और इंडस्ट्रियल इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में निवेश को आकर्षित करना।
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अमेरिका और यूरोप के बीच चल रहे टैरिफ युद्धों (Tariff War) का असर वैश्विक निवेश माहौल पर पड़ा है।
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क्या ऐसे में झारखंड को निवेश मिल पाएगा?
यात्रा का उद्देश्य: झारखंड में विदेशी निवेश को बढ़ावा देना
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का यह दौरा कोई सामान्य राजनीतिक या सांस्कृतिक यात्रा नहीं है। यह पूरी तरह से आर्थिक और औद्योगिक निवेश को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। इस यात्रा के माध्यम से राज्य को टेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी, हेल्थ टेक और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में विदेशी निवेश प्राप्त हो सकता है। विशेष रूप से स्वीडन की क्लीन एनर्जी कंपनियां और स्पेन की ऑटोमोबाइल व इन्फ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्री झारखंड में रुचि दिखा सकती हैं।

यूरोप की आर्थिक पृष्ठभूमि: ट्रंप टैरिफ वार का प्रभाव
अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच टैरिफ वार का असर अब भी महसूस किया जा रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में शुरू हुई यह टकराहट, जो स्टील, एल्यूमिनियम और ऑटो सेक्टर से संबंधित थी, उसने यूरोप के कई देशों को अपने निर्यात बाजारों को पुनर्संतुलित करने पर मजबूर किया।
स्वीडन की स्थिति:
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स्वीडन एक उच्च-प्रौद्योगिकी और पर्यावरण-हितैषी अर्थव्यवस्था है।
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क्लाइमेट न्यूट्रल टेक्नोलॉजी, बायोफ्यूल, और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स में यह देश अग्रणी है।
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टैरिफ वार से स्वीडन को अमेरिका में एक्सपोर्ट में कमी का सामना करना पड़ा, इसलिए यह नए बाजार तलाश रहा है।
स्पेन की स्थिति:
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स्पेन अब एक पुनर्जीवित होती अर्थव्यवस्था है, जिसने कोविड के बाद अपनी आर्थिक नीति में बदलाव किए हैं।
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इन्फ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन और स्मार्ट ट्रांसपोर्ट सेक्टर में स्पेन की कंपनियां तेजी से अंतरराष्ट्रीय निवेश के अवसर तलाश रही हैं।
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भारत जैसे बड़े, श्रम-आधारित बाजार उनके लिए आकर्षण हैं।

झारखंड की संभावनाएं: क्या राज्य तैयार है?
झारखंड में भारी मात्रा में खनिज संसाधन हैं, लेकिन तकनीक, ऊर्जा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। हेमंत सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में इंडस्ट्रियल पॉलिसी, सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम और स्किल डेवेलपमेंट मिशन पर ध्यान दिया है।
राज्य की तैयारियां:
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रांची, जमशेदपुर, बोकारो जैसे औद्योगिक केंद्रों को स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में बदला जा रहा है।
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ग्रीन एनर्जी पार्क, स्टार्टअप इनक्यूबेशन हब और इलेक्ट्रॉनिक क्लस्टर्स विकसित किए जा रहे हैं।
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कई देशों के राजनयिक प्रतिनिधियों से झारखंड सरकार की बातचीत हो चुकी है।
क्यों जरूरी है यह यात्रा?
भारत की फेडरल स्ट्रक्चर में राज्य सरकारें अब अपने स्तर पर विदेशी निवेश लाने के लिए प्रयासरत हैं। गुजरात, तमिलनाडु और महाराष्ट्र पहले ही इस दिशा में सफल हो चुके हैं। झारखंड जैसे राज्य के लिए यह दौरा एक ब्रांडिंग अवसर भी है।
राजनीतिक संदेश भी छिपा है
यह यात्रा 2024-25 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले झारखंड सरकार की विकास केंद्रित छवि को पेश करने का भी एक मौका है। हेमंत सोरेन यह दिखाना चाहते हैं कि उनकी सरकार केवल राजनीति तक सीमित नहीं बल्कि ग्लोबल सोच और स्थानीय क्रियान्वयन पर यकीन करती है।
चुनौतियां क्या हैं?
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झारखंड को अभी भी लॉ एंड ऑर्डर और नक्सलवाद की पुरानी छवि से जूझना पड़ता है।
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निवेशकों को स्थिर प्रशासन, आसान नीतियों और लॉन्ग-टर्म सपोर्ट की ज़रूरत होती है।
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ब्यूरोक्रेसी की जटिलता और भ्रष्टाचार झारखंड में अब भी एक चिंता का विषय हैं।
निष्कर्ष: उम्मीद की किरण या दिखावा?
हेमंत सोरेन की यह यात्रा अगर केवल एक औपचारिक दौरा बनकर रह जाती है, तो यह झारखंड के लिए खोया हुआ अवसर होगा। लेकिन यदि इसे ठोस नीतियों, फॉलोअप मीटिंग्स और निवेश मॉडल्स के साथ आगे बढ़ाया जाए, तो यह राज्य की तस्वीर बदल सकता है।
स्वीडन और स्पेन वर्तमान में वैश्विक निवेश के लिए सकारात्मक संकेत दे रहे हैं। यदि झारखंड इन अवसरों का सही उपयोग करता है, तो वह न केवल निवेश ला सकता है बल्कि राज्य के युवाओं को रोजगार और तकनीकी विकास के नए आयाम भी मिल सकते हैं।
