मुख्य बिंदु-
• स्कूल सर्वे में सरना/अन्य धर्म का विकल्प नहीं
• आदिवासी बच्चों को हिंदू कॉलम में दर्ज करने का आरोप
• इसे आदिवासी पहचान मिटाने की साजिश बताया
• हेमंत सरकार की चुप्पी पर सवाल
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रांची।
पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव ने स्कूली शिक्षा विभाग द्वारा चलाए जा रहे सर्वे अभियान को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि इस सर्वे में छात्रों से जो विवरण लिया जा रहा है, उसमें आदिवासी छात्रों के लिए धर्म के कॉलम में सरना या ‘अन्य (Other)’ का कोई विकल्प ही नहीं दिया गया है।
गीताश्री उरांव के अनुसार, जो बच्चे सरना आदिवासी समाज से आते हैं, उनके पास अपने वास्तविक धर्म को दर्ज कराने का कोई विकल्प नहीं है। इस कारण सर्वे कर रहे शिक्षक मजबूरी में ऐसे बच्चों को हिंदू या किसी अन्य धर्म के कॉलम में दर्ज कर रहे हैं। उन्होंने इसे सरना आदिवासी बच्चों के हिंदूकरण की प्रक्रिया करार दिया।
पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि यह मामला केवल तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले पर हेमंत सरकार की चुप्पी चिंताजनक है।
गीताश्री उरांव ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार पहले ही जनगणना में सरना धर्म के कॉलम या ‘अन्य’ विकल्प को हटाकर आदिवासियों की पहचान को कमजोर करने की दिशा में कदम उठा चुकी है। अब वही प्रक्रिया स्कूल स्तर पर कराए जा रहे सर्वे में भी दिखाई दे रही है।
उन्होंने मांग की कि स्कूली शिक्षा विभाग के सर्वे फॉर्म में तत्काल सरना धर्म का स्पष्ट कॉलम जोड़ा जाए, ताकि आदिवासी बच्चों की पहचान सही तरीके से दर्ज हो सके। साथ ही राज्य सरकार से इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाने और हस्तक्षेप करने की मांग भी की गई है।
