बेटे की हार और RJD की पराजय- क्या झारखंड में संजय यादव को झेलना होगा नुकसान?

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झारखंड की राजनीतिक हलचल

रांची- झारखंड के 25वें स्थापना दिवस समारोह में रांची के मोरहाबादी मैदान में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ RJD कोटे के मंत्री संजय यादव भी नजर आए। हालांकि मंच पर उनकी मौजूदगी सामान्य राजनीतिक तस्वीर जैसी ही दिखी, लेकिन बिहार चुनाव नतीजों और गठबंधन राजनीति के बदलते संकेतों के बीच यह फोटो नई चर्चाओं को हवा दे रही है।

बिहार में RJD की करारी हार, संजय यादव के परिवार को भी बड़ा झटका

दरअसल, बिहार चुनाव में RJD को बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। संजय यादव के सुपुत्र रजनीश यादव भागलपुर की कहलगांव विधानसभा सीट से चुनाव हार गए। इस सीट पर जदयू के प्रत्याशी शुभानंद मुकेश ने रजनीश यादव को 50 हजार से अधिक मतों से पराजित किया। यह भारी अंतर RJD की जमीन पर कमजोर पकड़ और बदलते जनमत को स्पष्ट करता है।

JMM को एक भी सीट नहीं मिलने से रिश्तों में खिंचाव

बिहार चुनाव में RJD और कांग्रेस ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) को एक भी सीट नहीं दी थी। इस फैसले से झामुमो के भीतर नाराजगी है।  पार्टी ने स्पष्ट कहा था कि वे पूरे गठबंधन की समीक्षा करेंगे। इसके बाद से ही झारखंड के सत्ता समीकरण में संभावित बदलाव की चर्चाएं तेज हैं।

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सबसे बड़ा राजनीतिक खतरा संजय यादव के लिए?

बदलते हालात में सबसे ज्यादा दबाव RJD कोटे के मंत्री संजय यादव पर माना जा रहा है।
• RJD की बिहार में करारी हार
• उनका पारिवारिक राजनीतिक नुकसान
• JMM को सीट न देने का विवाद
• गठबंधन समीक्षा की घोषणा
— ये सभी कारण संजय यादव पर राजनीतिक दबाव बढ़ा सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि, बदलते समीकरण में झारखंड सरकार में RJD-कांग्रेस की हिस्सेदारी पर पुनर्विचार हो सकता है और ऐसे में संजय यादव की कुर्सी पर सीधा असर पड़ना स्वाभाविक है।

लगातार बदल रहा राजनीतिक माहौल

स्थापना दिवस समारोह में मुख्यमंत्री के साथ संजय यादव की मौजूदगी ने संकेत दिया कि फिलहाल गठबंधन द्वारा कोई बड़ा निर्णय नहीं लिया गया है। लेकिन बिहार चुनाव की पृष्ठभूमि और JMM की पहले से मौजूद नाराजगी यह स्पष्ट करती है कि अगले कुछ दिनों में गठबंधन राजनीति में चुपचाप बड़ा फेरबदल हो सकता है। फिलहाल सभी की नजरें मुख्यमंत्री के अगले राजनीतिक कदम पर टिकी हुई हैं।

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