Hemant Soren Speech

CM सोरेन का बड़ा बयान—देश में आदिवासी नेतृत्व को लगातार दबाया गया.

झारखंड/बिहार ताज़ा ख़बर राष्ट्रीय ख़बर विधानसभा चुनाव

जल, जंगल, जमीन से जुड़े समाज को हाशिए पर रखा गया: मुख्यमंत्री

रांची- मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने देश के विभिन्न राज्यों से आए आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों से मुलाकात के दौरान कहा कि जल, जंगल और जमीन से गहरे जुड़े समुदाय को दशकों से हाशिए पर रखा गया है। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय संकट इसी उपेक्षा का परिणाम है।
उन्होंने दिल्ली के खराब वायु गुणवत्ता का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रकृति से जुड़े समाज की आवाज़ दबाने का असर पूरे देश को भुगतना पड़ रहा है।

बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हो और दिशोम गुरुजी जैसे वीरों की संघर्षगाथा हमारी शक्ति

मुख्यमंत्री सोरेन ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसके संघर्ष से है।
भगवान बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हो और झारखंड के दिशोम गुरुजी जैसे वीरों ने समाज को आगे बढ़ने की ताकत दी है।
उन्होंने कहा कि यह विरासत अकेले किसी राज्य की नहीं बल्कि पूरे देश की धरोहर है।

आदिवासी नेतृत्व को दबाया गया, परंपरा बदलने का समय

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर-पूर्व और कुछ राज्यों को छोड़कर देश में आदिवासी मुख्यमंत्री बनाना सामान्य बात नहीं रही।
“जब झारखंड में हमें मौका मिला, तब पड़ोसी राज्यों ने भी आदिवासी नेतृत्व को जगह देनी शुरू की,” उन्होंने कहा।
उन्होंने माना कि सत्ता के रास्ते में अनेक व्यवस्थागत चुनौतियाँ मौजूद रहती हैं।

देशभर के आदिवासी प्रतिनिधियों का एकजुट होना ऐतिहासिक कदम

आज रांची में देश के विभिन्न हिस्सों से आए आदिवासी समाज के अगुवा नेताओं और प्रतिनिधियों ने एकजुटता का संदेश दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वह समाज के साथ हर कदम पर खड़े हैं और प्रत्येक प्रतिनिधि से जुड़ने के लिए उनके संपर्क विवरण संकलित करने का निर्देश दिया गया है।
उन्होंने कहा कि अपने राज्यों की यात्राओं के दौरान वे उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलेंगे।

अलग-अलग संघर्ष से नहीं मिलेगा लाभ, एकजुटता ही विकल्प

हेमंत सोरेन ने कहा कि आदिवासी समाज जब-जब अलग-अलग लड़ाइयाँ लड़ता है, तब उसका असर कमजोर पड़ जाता है।
उन्होंने शिकायत की कि जनगणना प्रक्रियाओं में आदिवासी समाज को समुचित स्थान नहीं मिल रहा है, जिससे भविष्य में समुदाय को अस्तित्व संकट का सामना करना पड़ सकता है।

आर्थिक, सामाजिक, बौद्धिक और राजनीतिक क्षेत्र में अवसरों की कमी

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में आदिवासी समाज को आज भी शासन, शिक्षा, अर्थव्यवस्था और राजनीति में भरपूर अवसर नहीं मिल सके हैं।
उन्होंने प्रश्न उठाया कि इस विशाल समुदाय के कितने लोगों को प्रमुख क्षेत्रों में आगे बढ़ने का मौका मिला है?

चुनौतियाँ बढ़ेंगी, लेकिन एकजुट समाज बड़ी ताकत बन सकता है

मुख्यमंत्री सोरेन ने स्वीकार किया कि मुख्यमंत्री बनने के साथ चुनौतियाँ भी बढ़ती जा रही हैं।
उन्होंने कहा, “बड़ी मछली हमेशा छोटी मछली को खाने की कोशिश करती है, लेकिन यदि हम एक समूह के रूप में एकजुट हो जाएँ, तो बड़ी ताकत बन सकते हैं।”

क्रांतिकारी झारखंड की धरती पर प्रतिनिधियों का स्वागत

समापन में उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज सदियों से स्वाभिमान और संघर्ष की पहचान रहा है।
उन्होंने देशभर से आए प्रतिनिधियों का झारखंड की क्रांतिकारी धरती पर हार्दिक स्वागत किया और एकजुटता को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *