मुख्य बिंदु
- 32,582 फिंगरप्रिंट डिवाइस खरीदने का प्रस्ताव
- करीब 16 करोड़ रुपये खर्च की योजना
- पुराने डिवाइस में तकनीकी खामियों का आरोप
- शिक्षक निजी मोबाइल से अटेंडेंस देने को मजबूर
- हाईकोर्ट आदेश के बावजूद विभाग पर सवाल
रांची: बायोमेट्रिक डिवाइस खरीद को लेकर नया विवाद
रांची, 26 मार्च 2026 — झारखंड में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के तहत एक बार फिर बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा ज्ञानोदय योजना के अंतर्गत राज्य भर के शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मियों के लिए 32,582 एल-1 श्रेणी के फिंगरप्रिंट डिवाइस खरीदने का प्रस्ताव राज्य योजना प्राधिकृत समिति के समक्ष रखा गया है। इस खरीद पर लगभग 16 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
शिक्षक मोर्चा ने उठाए गंभीर सवाल
झारखंड प्रदेश संयुक्त शिक्षक मोर्चा के प्रदेश संयोजक अमीन अहमद, विजय बहादुर सिंह, आशुतोष कुमार और प्रवक्ता अरुण कुमार दास ने संयुक्त बयान जारी कर इस प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि विभाग को कई बार इस विषय पर अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
पुराने डिवाइस में तकनीकी खामियां
मोर्चा का आरोप है कि पिछले दशक में भी ज्ञानोदय योजना के तहत टैबलेट और फिंगरप्रिंट डिवाइस खरीदे गए थे, लेकिन उनमें तकनीकी खामियां होने के कारण शिक्षकों की बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती थी। इसके बावजूद उसी प्रकार के डिवाइस की पुनः खरीदारी सवाल खड़े करती है।
निजी मोबाइल से अटेंडेंस देने को मजबूर शिक्षक
विभागीय आदेश के कारण राज्य के शिक्षक अपने निजी मोबाइल फोन से बायोमेट्रिक अटेंडेंस दर्ज करने को मजबूर हैं। मोर्चा का कहना है कि यह न केवल असुविधाजनक है, बल्कि शिक्षकों पर अतिरिक्त बोझ भी डालता है।
हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी का आरोप
मोर्चा ने यह भी आरोप लगाया कि इस मुद्दे पर दायर WP(S) संख्या 4571/2024 में उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद विभाग अपनी मनमानी कर रहा है और फिर से बड़े पैमाने पर डिवाइस खरीदने की योजना बना रहा है।
ई-विद्यावाहिनी पोर्टल पर उठे सवाल
शिक्षक संगठनों ने ‘ई-विद्यावाहिनी’ पोर्टल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब अन्य सरकारी कर्मचारी आधार आधारित बायोमेट्रिक सिस्टम से आसानी से उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं, तो शिक्षकों के लिए त्रुटिपूर्ण पोर्टल का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है, यह समझ से परे है।
उच्च गुणवत्ता वाले डिवाइस की मांग
मोर्चा ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया के माध्यम से विभाग से अपील की है कि उच्च गुणवत्ता वाले आधार-आधारित बायोमेट्रिक डिवाइस की खरीदारी कर स्कूलों को उपलब्ध कराया जाए, ताकि शिक्षकों को निजी मोबाइल के इस्तेमाल से राहत मिल सके।
वेतन भुगतान से जुड़ा है मामला
यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि शिक्षकों का मासिक वेतन बायोमेट्रिक अटेंडेंस और उपस्थिति विवरणी जमा करने के बाद ही जारी होता है। ऐसे में तकनीकी समस्याओं का सीधा असर उनके वेतन पर पड़ता है।
शिक्षा की गुणवत्ता पर असर
मोर्चा का कहना है कि पिछले एक दशक से ई-विद्यावाहिनी पोर्टल में मौजूद खामियों के कारण शिक्षकों को विभागीय अधिकारियों की नाराजगी झेलनी पड़ती है, जिसका सीधा असर शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से इस लचर व्यवस्था को जल्द सुधारने की मांग की है।
निष्कर्ष
स्पष्ट है कि बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम को लेकर सरकार और शिक्षक संगठनों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। अब देखना होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है और क्या शिक्षकों की समस्याओं का समाधान हो पाता है या नहीं।
