“28 अप्रैल को मशाल जुलूस, महिलाओं के अधिकार पर सियासी संदेश”
रांची- भाजपा नेत्री एवं जमशेदपुर पूर्वी की विधायक पूर्णिमा साहू ने कहा कि 16-17 अप्रैल को संसद में देश की आधी आबादी को समान अधिकार और भागीदारी देने का एक ऐतिहासिक अवसर आया था, लेकिन कांग्रेस और इंडी गठबंधन के दलों ने इसका विरोध कर महिलाओं के साथ विश्वासघात किया।
वे भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित कर रही थीं।
“महिलाओं को अधिकार देना उपकार नहीं”
साहू ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन में स्पष्ट कहा है कि महिलाओं को सम्मान, अधिकार और नीति-निर्माण में भागीदारी देना उनका स्वाभाविक अधिकार है, न कि कोई उपकार।
विपक्ष पर हमला
उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्षों तक न विधानसभा और न ही लोकसभा में महिलाओं को पर्याप्त अवसर दिया गया। लेकिन जब अधिकार देने का समय आया, तब उनका महिला-विरोधी चेहरा सामने आ गया।
परिसीमन पर क्या कहा गया
साहू ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी स्पष्ट किया है कि परिसीमन से किसी राज्य को नुकसान नहीं होगा, बल्कि यह जनसंख्या के आधार पर संतुलित और न्यायसंगत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करेगा। इसके बावजूद विपक्ष भ्रम फैलाने का काम कर रहा है।
“नारी शक्ति वंदन अधिनियम” पर बयान
उन्होंने कहा कि “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” पहले से ही जनगणना और परिसीमन से जुड़ा हुआ है। 2023 में जब यह विधेयक पेश किया गया था, तब विपक्ष ने इसका विरोध नहीं किया, लेकिन अब इसके लागू होने पर राजनीति की जा रही है।
महिलाओं की भागीदारी पर जोर
साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पंचायत से संसद तक महिलाओं को अधिक अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जबकि कांग्रेस का इतिहास महिलाओं के प्रति नकारात्मक रहा है।
28 अप्रैल को मशाल जुलूस
उन्होंने जानकारी दी कि 28 अप्रैल को शाम 5 बजे जिला स्कूल मैदान से अल्बर्ट एक्का चौक तक हजारों महिलाओं द्वारा मशाल जुलूस निकाला जाएगा, जो नारी शक्ति और अधिकारों की अभिव्यक्ति होगा।
ये लोग रहे मौजूद
इस अवसर पर आरती कुजूर, सीमा सिंह, रफिया नाज़ और बबीता झा भी उपस्थित थीं।
