ठेका मज़दूरों को आउटसोर्सिंग के हवाले करने की तैयारी, मजदूरों में आक्रोश
रांची, 17 जुलाई 2025- HEC (हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड) रांची के करीब 1400 ठेका मज़दूरों के भविष्य पर संकट मंडराने लगा है। कंपनी प्रबंधन ने सभी ठेका मजदूरों को आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से रखने का निर्णय लिया है। इस फैसले को अमल में लाने के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है, जिससे मजदूरों में भारी असंतोष और भय का माहौल बन गया है।
आंदोलनरत मजदूरों को आजसू पार्टी का समर्थन
बीते कई दिनों से HEC के ठेका मजदूर अपने नौकरी की स्थिरता और भविष्य की सुरक्षा को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। शनिवार को इस आंदोलन को राजनीतिक समर्थन तब मिला जब आजसू पार्टी ने मजदूरों के बीच पहुंचकर अपना साथ जताया।
आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो के निर्देश पर पार्टी के वरिष्ठ नेता देवशरण भगत और प्रवीण प्रभाकर धरना स्थल पर पहुंचे और प्रदर्शनकारी मजदूरों से मुलाकात की। उन्होंने मजदूरों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि पार्टी हर स्तर पर इस मुद्दे को उठाएगी और HEC प्रबंधन पर दबाव बनाएगी।
मजदूरों की चिंता: नौकरी और भविष्य अधर में
मजदूरों का कहना है कि HEC प्रबंधन की इस नीति से उनकी नौकरी असुरक्षित हो जाएगी और आजीविका पर गहरा असर पड़ेगा। ठेका मजदूरों को पहले से ही वेतन भुगतान, सुविधाओं और सुरक्षा को लेकर समस्याएं रही हैं, और अब आउटसोर्सिंग के जरिए इन चुनौतियों के और बढ़ने की आशंका है।
टेंडर प्रक्रिया पर सवाल
मजदूर संगठनों ने आरोप लगाया है कि HEC द्वारा जिस तरीके से आउटसोर्सिंग के लिए टेंडर निकाला गया है, वह पारदर्शिता से कोसों दूर है। कई मजदूरों को बिना जानकारी के बाहर करने की आशंका जताई जा रही है। इससे मजदूरों में यह डर घर कर गया है कि कहीं लंबे समय से काम कर रहे कर्मियों को अचानक बाहर का रास्ता न दिखा दिया जाए।
आजसू का बयान: मजदूरों के हक के लिए सड़क से सदन तक लड़ाई
धरना स्थल पर मौजूद देवशरण भगत ने कहा,
“HEC में कार्यरत ठेका मजदूरों की मेहनत और समर्पण को अनदेखा कर कंपनी प्रबंधन ने गलत फैसला लिया है। आजसू पार्टी इस अन्याय के खिलाफ आवाज़ बुलंद करेगी और मज़दूरों के साथ खड़ी है।”
प्रवीण प्रभाकर ने कहा कि यह सिर्फ एक संस्थान का मामला नहीं, बल्कि राज्य में मज़दूर वर्ग के भविष्य से जुड़ा सवाल है।
सरकार और प्रबंधन से समाधान की मांग
आंदोलनकारी मजदूरों और आजसू पार्टी ने HEC प्रबंधन से मांग की है कि टेंडर प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए और मौजूदा ठेका मजदूरों के हितों की रक्षा की जाए। साथ ही, आउटसोर्सिंग के नाम पर मजदूरों की छंटनी या शोषण न हो, इसके लिए स्पष्ट नीति और निगरानी की व्यवस्था की जाए।
स्थिति संवेदनशील, संघर्ष जारी
HEC मजदूरों का यह आंदोलन फिलहाल शांतिपूर्ण है, लेकिन अगर उनकी मांगों को अनसुना किया गया तो यह संघर्ष तेज और व्यापक रूप ले सकता है। आजसू पार्टी के समर्थन से अब यह मामला और भी राजनीतिक तूल पकड़ सकता है।
