मुख्य बिंदु
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मुख्यमंत्री ने वितरहित संस्थाओं के लिए राशि स्वीकृत की थी
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600 संस्थानों के 7–8 हजार शिक्षकों को नहीं मिला बकाया अनुदान
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विभागीय लापरवाही से 9 करोड़ रुपये लैप्स हो गए
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शिक्षकों में नाराजगी, कहा – हर साल जानबूझकर देर करता है विभाग
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मोर्चा ने 4 नवंबर को बैठक बुलाई, भविष्य की रणनीति तय होगी
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मुख्यमंत्री से उच्च स्तरीय जांच की मांग
छठ पर्व पर भी नहीं मिला वितरहित शिक्षकों को अनुदान
रांची, 25 अक्टूबर 2025– मुख्यमंत्री द्वारा वित्त रहित संस्थाओं के लिए राशि स्वीकृत किए जाने के बावजूद राज्य के लगभग 600 संस्थानों में कार्यरत 7 से 8 हजार शिक्षकों को अब तक बकाया अनुदान राशि नहीं मिली है। वित्तीय वर्ष 2024–25 के लिए तय 12% अनुदान का भुगतान छठ पर्व से पहले नहीं होने पर शिक्षकों में गहरी नाराजगी है।
विभागीय लापरवाही से लाखों शिक्षक परेशान
शिक्षक संगठनों का कहना है कि विभाग की निष्क्रियता और जानबूझकर की गई देरी के कारण शिक्षकों को हर साल आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। इस बार भी संचिका आने के बावजूद 24 अक्टूबर को छुट्टी का बहाना बनाकर विभाग ने राशि जारी नहीं की।
पिछले साल भी हुई थी देरी
विगत वर्ष भी विभाग ने दीपावली और छठ पर्व के बाद तक 27% अनुदान की राशि रोककर रखी थी। इस बार सरकार ने 100 करोड़ रुपये आवंटित किए थे, जबकि संस्थाओं पर केवल 97 करोड़ रुपये का खर्च आता है। इसके बावजूद समय पर राशि नहीं भेजी गई।
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9 करोड़ रुपये लैप्स, शिक्षकों में आक्रोश
रिपोर्ट के अनुसार विभागीय गड़बड़ी से 31 मार्च को लगभग 9 करोड़ रुपये लैप्स हो गए। जबकि वास्तविक रूप से केवल 8 करोड़ रुपये खर्च होते। इससे साबित होता है कि अनुदान के वितरण में गंभीर अनियमितता है।
मोर्चा ने सरकार से मांगी जांच
शिक्षक मोर्चा के नेता रघुनाथ सिंह, हरिहर प्रसाद कुशवाहा, फजलुल कादिर अहमद, गणेश महतो, अरविंद सिंह, चंदेश्वर पाठक, नरोत्तम सिंह, संजय कुमार, देवनाथ सिंह, मनोज तिर्की, मनीष कुमार और मुरारी प्रसाद सिंह ने बयान जारी कर मुख्यमंत्री से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
4 नवंबर को रांची में अहम बैठक
मोर्चा ने 4 नवंबर 2025 को सर्वोदय बाल निकेतन उच्च विद्यालय, धुर्वा (रांची) में बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। इसमें यह तय किया जाएगा कि अगले वित्तीय वर्ष 2025–26 से संस्थाएं अनुदान लेंगी या नहीं।
“हर साल दोहराई जाती है गलती”
मोर्चा नेताओं का कहना है कि विभाग हर वर्ष पर्याप्त राशि उपलब्ध होने के बावजूद मार्च माह में पूरा अनुदान नहीं देता। इससे शिक्षकों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है और वे त्योहार भी उदासी में मनाने को विवश हैं।
