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झारखंड में इंडिया गठबंधन ने क्यों नहीं दिया मुसलमानों को एक भी टिकट।

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जामताड़ा के कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी का दर्द गाहे बगाहे सामने आता रहता है। गोड्डा से अपने पिता फुरकान अंसारी के लिए टिकट की चाह रखने वाले इरफान अंसारी कहते हैं कि, झारखंड राज्य में 18% मुसलमानों की आबादी होने के बावजूद एक सीट भी मुसलमान को नहीं देना कांग्रेस पार्टी की बड़ी भूल है। यह कदम पार्टी के लिए आत्मघाती हो सकता है। इतनी बड़ी आबादी को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। कुछ नेताओं ने भ्रम फैलाया है कि, अगर मुसलमानों को टिकट दिया गया तो वोट का ध्रुवीकरण हो जाएगा तो इसकी क्या गारंटी है कि अन्य जिसको भी टिकट दिया जा रहा है वे जीत जाएंगे। 2%, 3% या फिर 4% वाले लोगों को टिकट मिल रहा है तो फिर 18% वालों को क्यों नजर अंदाज किया जा रहा है। पार्टी इस पर विचार करे। लोकसभा के साथ-साथ विधानसभा पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा। मुसलमानों का वोट कांग्रेस पार्टी हल्के में ना ले। कांग्रेस पार्टी द्वारा अल्पसंख्यक सामुदाय को नजरअंदाज करने का ही नतीजा है कि, अन्य राज्यों में अल्पसंख्यक समुदाय का बोर्ड क्षेत्रीय पार्टियों की तरफ जा रहा है। मुसलमान अपने आप को ठगा महसूस कर रहा है। पार्टी इस पर पुनर्विचार करे। इतनी बड़ी आबादी वाले समाज को उनका सही हक देना देने का काम करे।

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झारखंड प्रभारी के साथ इरफान अंसारी।

 

इरफान अंसारी के इस गुहार को पार्टी ने सिरे से खारिज कर दिया और गोड्डा से दीपिका पांडे सिंह को चुनाव में उतार दिया। यहां से इरफान अंसारी के पिता फुरकान अंसारी के लिए टिकट चाहते थे। अभी तक इंडिया एलायंस की तरफ से जितनी भी सीटों को की घोषणा की गई है उसमें एक भी कैंडिडेट अल्पसंख्यक समुदाय से नहीं है। बीजेपी वैसे भी मुसलमानों को टिकट नहीं देती है।

कांग्रेस के इस रूख का क्या झारखंड मुक्ति मोर्चा को फायदा हो सकता है। राजनीतिक पंडित मानते हैं कि, मुसलमान का झुकाव झामुमो की तरफ और जा सकता है। झामुमो ने अभी हाल ही में सरफराज अहमद को राज्यसभा भेजा है। कैबिनेट मंत्री के तौर पर भी हफिजुल हसन को मौका दिया गया है। ऐसे में माइनॉरिटी कम्युनिटी जेएमएम की तरफ और अपना रुख बढ़ा सकती है। ऐसे में क्या कांग्रेस को आने वाले दिनों में अल्पसंख्यक समुदाय का वोट मिलना और मुश्किल हो जाएगा। इरफान अंसारी के मुताबिक पार्टी का जो रुख है उससे अल्पसंख्यक दूर होते जा रहे हैं।

इंडिया एलायंस या फिर कांग्रेस के इस रुख पर मुस्लिम समाज के द्वारा कोई खास प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मुसलमान के विभिन्न संगठनों के द्वारा भी राजनीतिक तौर पर बयान बाजी करने से बचा जा रहा है। हालांकि, सोशल मीडिया में इस बात को खुलकर लिखा जा रहा है कि कांग्रेस सिर्फ मुसलमान का वोट चाहती है उसे प्रतिनिधित्व नहीं देती है।

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